इसके अलावा विधानसभा चुनाव के दौरान एक बात जो अजित पवार को और बुरी लगी वह अपने पोते रोहित पवार को चुनाव का टिकट देना था। शरद पवार ने अपने पोते रोहित को न केवल विधानसभा का टिकट दिया बल्कि उसे जिताने के लिए खूब प्रचार भी किया।
विधानसभा चुनाव से पहले शरद पवार के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एफआईआर दर्ज कर ली। तब उन्होंने ईडी ऑफिस जाने का फैसला किया लेकिन राज्य में चुनाव पूर्व गहमागहमी के माहौल को शांत करने के लिए अजित ने खुद कुर्बानी देने की पेशकश की।
अजित ने शरद पवार से फोकस हटाने के लिए विधायक पद से इस्तीफा दे दिया जिससे चर्चा के केंद्र से शरद बाहर निकल गए। लेकिन, जब अजित पवार को ईडी का नोटिस आया तब उनके पक्ष में न तो शरद पवार न ही एनसीपी का कोई नेता सामने आया।
बताया जाता है कि राज्य में सरकार गठन की बैठकों के दौर के बीच अजित ने हमेशा उद्धव के मुख्यमंत्री बनने का विरोध किया। लेकिन, शरद पवार ने उनका साथ नहीं दिया। यहां तक की ईवीएम को लेकर आरोप-प्रत्यारोप के बीच जब अजित पवार ने जमीनी स्तर पर काम करने की वकालत की तब भी शरद पवार ईवीएम में गड़बड़ी पर ही अटकें रहे।