निचली अदालत ने जारी किया था वारंट
एक महिला ने अपने ससुराल वालों पर घरेलू हिंसा का केस दर्ज करवाया था। अदालत ने इसकी सुनवाई के दौरान आरोपियों पर गैर-जमानती वारंट जारी किए। वारंट के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई थी, पर निचली अदालत ने वारंट तामील करने के आदेश दिए थे।
जनता के धन से मिला था वेतन, लौटाना ही उचित
हाईकोर्ट ने कहा जिन महिला पुलिसकर्मियों को वारंट तामील करवाना था, उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। अदालत के आदेश पर प्रभावी कदम ही नहीं उठाया। इसका उन्होंने कोई वाजिब जवाब भी नहीं दिया है। एक लोकसेवक होने के नाते उन्होंने संतोषजनक काम नहीं किया, अदालत का आदेश नहीं माना।
फिर भी उन्हें जनता के धन से वेतन मिलता रहा। आज उनका ट्रांसफर भले ही दूसरी जगह हो चुका है, लेकिन जितने समय वे अन्नानगर महिला पुलिस थाने में रहीं, उस समय मिले वेतन के लिए वे पात्र नहीं थीं। इसे जनता को लौटाना ही उचित है।