फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सवालों में संस्था: 'पिंजरे' में कैद सीबीआई को करें आजाद, आदेश के दौरान मद्रास हाईकोर्ट ने की बड़ी टिप्पणी

Wed, 18 Aug 2021 08:45 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई

सार

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि सीबीआई को नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की तरह स्वायत्तता देनी चाहिए, जो कि केवल संसद के प्रति जवाबदेह है।
विज्ञापन
सीबीआई - फोटो : social media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुप्रीम कोर्ट के बाद अब मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को लेकर बड़ी टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार को निर्देश देते हुए कहा कि  'पिंजरे' में बंद सीबीआई को और स्वायत्ता देने की जरूरत है। हाईकोर्ट ने कहा कि विपक्ष के अनुसार सीबीआई भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के हाथों में एक राजनीतिक उपकरण बन गई है जिसे आजाद करने की जरूरत है। अदालत ने कहा कि सीबीआई को नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की तरह स्वायत्तता होनी चाहिए, जो कि केवल संसद के प्रति जवाबदेह है।

विज्ञापन


हाईकोर्ट ने मौजूदा व्यवस्था में बदलाव करते हुए अपने 12 सूत्री निर्देशों में कहा कि यह आदेश 'पिंजरे' में बंद तोते सीबीआई को रिहा करने का प्रयास है। गौरतलब है कि वर्ष 2013 में कोलफील्ड आवंटन मामलों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एजेंसी का वर्णन पिंजरे के तोते के रूप में किया था। उस समय, विपक्ष में रहने वाली भाजपा ने एजेंसी पर कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा नियंत्रित होने का आरोप लगाया था। इतना ही नहीं बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने भी सीबीआई पर निशाना साधा था। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री द्वारा नियंत्रित 'साजिश ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन' कहा था।

अदालत ने कहा कि एजेंसी की स्वायत्तता तभी सुनिश्चित होगी जब उसे वैधानिक दर्जा दिया जाएगा। अदालत ने आगे कहा कि भारत सरकार को अधिक शक्तियों एवं अधिकार क्षेत्र के साथ वैधानिक दर्जा देने वाले एक अलग अधिनियम के अधिनियमन पर विचार करने और निर्णय लेने का निर्देश दिया जाता है। केंद्र सरकार प्रशासनिक नियंत्रण के बिना कार्यात्मक स्वायत्तता के साथ सीबीआई को स्वतंत्र करे।
विज्ञापन


बता दें कि 1941 में गठित, एजेंसी प्रधान मंत्री कार्यालय के तहत डीओपीटी (कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग) को रिपोर्ट करती है। इसके निदेशक को तीन सदस्यीय पैनल द्वारा चुना जाता है जिसमें प्रधान मंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश और विपक्ष के नेता शामिल होते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें