उत्तर प्रदेश के चार नव-सृजित जिलों में कुछ आदिवासी समुदायों को अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल करने के लिए एक विधेयक शुक्रवार को लोकसभा में चर्चा के लिए रखा गया, जिसमें सदस्यों ने ऐसी श्रेणियों के लिए आरक्षण नीतियों के बेहतर कार्यान्वयन की मांग की। जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (संशोधन) विधेयक, 2022 में संत कबीर नगर, कुशीनगर, चंदौली और संत रविदास नगर जिलों में रहने वाले गोंड, धुरिया, नायक, ओझा, पथरी और राजगोंड समुदायों को राज्य में अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने का प्रयास किया गया है।
गोंड समुदाय को अनुसूचित जाति की सूची से बाहर करने का भी प्रावधान
विधेयक में इन चार जिलों में रहने वाले गोंड समुदाय को अनुसूचित जाति की सूची से बाहर करने का भी प्रावधान है। बहस की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सदस्य दीपक बैज ने कहा कि छत्तीसगढ़ के कुछ आदिवासी समुदायों को अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल करने के लिए इसी तरह के प्रस्ताव पिछले कुछ वर्षों से केंद्र के पास लंबित हैं और मंत्री से इसमें तेजी लाने का आग्रह किया।
लोकसभा में बस्तर का प्रतिनिधित्व करने वाले बैज ने कहा कि कुछ साल पहले छत्तीसगढ़ में आदिवासी, सुरक्षाकर्मियों या नक्सलियों के शिकार होने के डर से जी रहे थे। हालांकि, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सत्ता संभालने के बाद से स्थिति में सुधार हुआ है। पहले सड़कों के दोनों ओर एक किलोमीटर तक ही सरकार की मौजूदगी महसूस होती थी, लेकिन अब प्रशासन आधार कार्ड जारी करने और आदिवासियों को स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए विशेष शिविर लगा रहा है।
बैज चाहते थे कि सरकार निजीकरण की नीति को खत्म कर दे क्योंकि इससे आदिवासियों के अधिकारों का हनन होगा। कांग्रेस सदस्य यह भी चाहते थे कि सरकार आदिवासी समुदायों के लिए आरक्षण की नीति को खत्म करने की कोशिश को भी खत्म करे। भाजपा के जगदंबिका पाल ने सरकार से देश में आदिवासी आबादी की जनगणना शुरू करने का आग्रह किया और जाति प्रमाण पत्र जारी करने में और स्पष्टता की मांग की।