केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने भारत के वेद पुराणों और रामायण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने इस्राइल और हमास के हिंसक संघर्ष के साथ-साथ रूस और यूक्रेन के झगड़े को खत्म करने में भगवान राम और उनके चरित्र से जुड़ी अहम बातों को रेखांकित किया। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में "राम मंदिर, राष्ट्र मंदिर - एक साझी विरासतः कुछ अनसुनी बातें" शीर्षक वाली पुस्तक का विमोचन किया गया।
केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और गीता सिंह ने मिलकर यह किताब लिखी है। प्रस्तावना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने लिखी है। विमोचन के समय संघ के वरिष्ठ नेता और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मुख्य संरक्षक इंद्रेश कुमार भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा, जो बेजुबान की जुबान भी जनता है वही राम हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी विवाद दूर करने के लिए संवाद जरूरी है।
पुस्तक विमोचन में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान समेत देश भर से आए मुस्लिम समुदाय के गणमान्य लोगों ने भी भाग लिया। राज्यपाल ने कहा कि इंसान एक महत्वाकांक्षी प्राणी है। अपनी ख्वाहिशों को पूरा करने के लिए अनैतिक काम करने से भी नहीं हिचकिचाता। ऐसा इसलिए क्योंकि अगर ख्वाहिशों को आदर्श करने वाला कोई न हो अर्थात मर्यादित करने वाला कोई न हो तो महत्वकांक्षा बेलगाम हो जाती है। ऐसे चुनौतीपूर्ण माहौल में मर्यादा पुरुषोत्तम राम की जरूरत समाज के हर तबके में है।
इंद्रेश कुमार ने कहा कि जो बेजुबान की भी जुबान जानता है वही खुदा है, वही परमेश्वर है, वही गॉड है, वही राम है। उन्होंने कहा कि पुस्तक विमोचन में देश भर से आई जनता ने साबित कर दिया है कि हम एक थे, एक हैं और एक ही रहेंगे। सरसंघचालक मोहन भागवत ने ठीक कहा था कि हम सभी का डीएनए एक है। इंद्रेश कुमार के मुताबिक जहां विवाद है वो सभी आगे आने वाले दिनों में संवाद से हल किए जा सकते हैं। इसके लिए सभी धर्मों को आगे आकर विचार करना होगा।
इंद्रेश कुमार ने आगामी 22 जनवरी को सुबह 11 बजे से दिन के 1 बजे तक दरगाहों, मदरसों, मकतबों, मस्जिदों में अपने अपने धर्मों के हिसाब से देश की उन्नति, प्रगति, सौहार्द के लिए इबादत करने की अपील की। राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद इसी दिन शाम को चिराग रोशन किए जाने की अपील भी की। राम लला की स्थापना के अवसर पर मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के कार्यकर्ता 6 दिन से लेकर 15 दिनों तक पदयात्रा कर अयोध्या पहुंचेंगे।
समारोह में विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा, इस पुस्तक की वर्तमान समय में बहुत आवश्यकता थी। राम जन्मभूमि के संबंध में इससे पहले जो भी किताबें आईं उसमें दो समुदायों के बीच वैमनस्य का आभास होता था। ऐसा लगता था जैसे मुस्लिमों के खिलाफ कोई साजिश हुई है। इसलिए इस किताब का बहुत अधिक महत्व है। पूर्व में भ्रम की स्थिति फैलाई गई। मुसलमान और ईसाई के संबंध में किताब सवाल करती है कि क्या राम जन्मभूमि का आंदोलन सिर्फ मुसलमानों के खिलाफ था?
उन्होंने महमूद गजनी का जिक्र कर भारत में लूट.. की चर्चा भी की। आलोक कुमार ने सवाल किया कि क्या बाबर और औरंगजेब जैसे लोगों को महत्व देना क्या साम्राज्यवादी ताकतों की नुमाइश नहीं थी? क्या हिंदुओं के मंदिर तोड़ कर मस्जिद बनाया जाना जायज था? क्या ऐसे कोई भी प्रार्थना या धार्मिक स्थल पूजनीय हो सकते हैं? देश की एकता समरसता का जिक्र कर आलोक कुमार ने कहा कि सनातन काल और हिंदू संस्कृति के समय से ही संविधान की धर्म निरपेक्षता बनी हुई है। अनेकों ऐसे मुद्दे हैं जिन पर चर्चा कर निर्णय लिए जा सकते हैं। भारत को एक भारत, श्रेष्ठ भारत बनाने के लिए हम सब एकजुट होकर आगे बढ़ेंगे।