आम चुनाव से पहले विपक्षी दलों ने ईवीएम की खराबी को बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी कर ली है। 21 विपक्षी दल सोमवार शाम एक साथ मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) से मुलाकात कर उन्हें मांगपत्र सौंपेंगे। अगर चुनाव आयोग से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो वे इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करेंगे। संसद भवन परिसर में शनिवार को विपक्ष की संयुक्त बैठक में ये फैसला किया गया।
सीईसी को सौंपने के लिए विपक्ष ने एक ज्ञापन भी तैयार किया है, जिस पर 26 नेताओं ने हस्ताक्षर किए हैं। कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी, अहमद पटेल, गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, मल्लिकार्जुन खरगे और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दस्तखत किए हैं, जबकि अन्य विपक्षी दलों की ओर से एक-एक नेता के हस्ताक्षर हैं। प्रस्ताव में मांग की गई है कि कम से कम 50 प्रतिशत ईवीएम मशीनों के साथ वीवीपैट लगाया जाए। यदि किसी चुनाव क्षेत्र में जीत का अंतर 5 प्रतिशत से कम है तो उस क्षेत्र में सभी वीवीपैट की गिनती की जानी चाहिए। इसी तरह यदि ईवीएम और वीवीपैट के मतों में अंतर है तो वीवीपैट के जरिये गिने गए वोट ही मान्य होंगे।
आम चुनाव के तीन मुद्दे
बैठक में अगामी लोकसभा चुनाव में उठाए जाने वाले मुद्दों पर भी बात हुई। सभी दलों ने मुख्य रूप से तीन मुद्दों बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं और सांविधानिक संस्थाओं पर हमले पर सरकार को घेरने की तैयारी की है। इनमें से हर मुद्दे पर देश के अलग-अलग शहरों में सेमीनार आयोजित किए जाएंगे। इनमें सभी नेता यह तय करेंगे कि उस मुद्दे पर कौन से बिंदु कैसे उठाए जाएंगे, जिनसे सरकार को घेरा जा सके। पहली बैठक 14 फरवरी को दिल्ली में होगी। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू अगली बैठक अमरावती में आयोजित करना चाहते हैं।