मार्च 2019 से अस्तित्व में आ चुके लोकपाल ने अब तक भ्रष्टाचार के आरोप में किसी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी पर केस चलाने की अनुमति नहीं दी है।
यह खुलासा एक आरटीआई आवेदन के जवाब में हुआ। यह भी सामने आया कि लोकपाल में जांच व अभियोजन निदेशकों की नियुक्ति तक नहीं हुई है। न ही भ्रष्टाचार की शिकायतों को दर्ज करने व भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों पर मुकदमे की प्रक्रिया को पूरा करने वाले दो वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति की गई।
आरटीआई के जवाब में कहा गया कि अभियोजन व जांच निदेशकों की नियुक्ति के लिए पैनल आवंटन का निवेदन सरकार को कर दिया गया है। इसका अहम काम सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच करना है।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा 23 मार्च 2019 को जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष को लोकपाल के अध्यक्ष की शपथ दिलाई गई थी। लोकपाल में 8 सदस्य होते हैं, जिनमें 4 न्यायिक व बाकी गैर न्यायिक होंगे। इस समय दो न्यायिक सदस्यों के पद खाली हैं।
शिकायतें : इस साल अब तक 80 प्रतिशत अधिक आ चुकीं
- 4,244 शिकायतें वित्त वर्ष 2021-22 में 31 जनवरी 2021 तक लोकपाल के पास आईं
- 2,355 शिकायतें साल 2020-21 में लोकपाल में आई थी
- 1,427 शिकायतें साल 2019-20 में आई थीं