सरकार ने अगले महीने शुरु होने वाले संसद के मानसून सत्र में लोकपाल कानून संबंधी संशोधन बिल के पेश करने का रास्ता साफ कर लिया है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह और वित्त मंत्री अरुण जेटली की मौजूदगी में बुधवार देर शाम हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह फैसला लिया गया कि आगामी सत्र में लोकपाल संबंधी संसद की स्थायी समिति की नौ सिफारिशों को बिल की शक्ल में पेश किया जाएगा।
इन सिफारिशों में सबसे अहम लोकपाल चुनाव समिति में लोकसभा में विपक्ष के नेता की जगह सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता को शामिल करना है।
गौरतलब है कि एनडीए सरकार ने लोकसभा में किसी को भी विपक्ष के नेता का दर्जा नहीं दिया है। जबकि जनवरी 2014 में वजूद में आ चुके लोकपाल एवं लोकायुक्त कानून के मुताबिक लोकपाल की नियुक्त के लिए गठित चुनाव समिति में प्रधानमंत्री, चीफ जस्टिस या सुप्रीम कोर्ट के जज,लोकसभा स्पीकर और जाने माने कानूनविद के साथ लोकसभा में विपक्ष के नेता का होना अनिवार्य है। लोकसभा में कांग्रेस के दस फीसदी से भी कम 45 सीट होने के आधार पर उसे विपक्ष का दर्जा नहीं दिया गया है।
लिहाजा कानून में संशोधन कर विपक्ष के नेता की जगह सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता को शामिल कर लोकपाल की नियुक्ति का रास्ता निकाला गया है। यह संशोधन मुख्य सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) की नियुक्ति का भी रास्ता साफ करेगा।
प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्य मंत्री जीतेन्द्र सिंह ने बृहस्पतिवार को इसकी जानकारी दी। स्थायी समिति ने कुल नौ सिफारिशें की हैं। इनमें लोकपाल को भारत सरकार के सचिव की जगह अतिरक्त सचिव का दर्जा दिए जाने की सिफारिश भी की गई है।
Published By Rahul Sankrityayan