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जीत की 5 वजह: काशी में फिर घर-घर मोदी, लौटा बेटा मां की गोदी

Thu, 23 May 2019 08:17 PM IST
ललित फुलारा ललित फुलारा, अमर उजाला, चुनाव डेस्क
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नरेंद्र मोदी - फोटो : अमर उजाला
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नरेंद्र मोदी को साल 2014 की ही तरह 2019 में भी मां गंगा का आशीर्वाद मिला है। मोदी ने वाराणसी से बंपर वोटों के साथ लोकसभा चुनाव 2019 जीता है। मोदी ने कांग्रेस के अजय राय और सपा की शालिनी यादव को करारी शिकस्त देकर चुनाव जीता। काशी में मोदी की यह जीत 2014 के लोकसभा चुनाव में हुई जीत से भी कई गुना बड़ी है और इसके पीछे कई कारण भी हैं।

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दरअसल, नरेंद्र मोदी वाराणसी सबसे पहले साल 2014 में उस वक्त आए थे जब वह भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे। उस वक्त मोदी ने वाराणसी की धरती से कहा था- 'न तो मैं आया हूं और न ही मुझे भेजा गया है। मुझे तो मां गंगा ने यहां बुलाया है। यहां आकर मैं वैसी ही अनुभूति कर रहा हूं, जैसे एक बालक अपनी मां की गोद में करता है।'

साल 2019 में मोदी ने कहा कि वाराणसी अभी और बदलेगा, भव्य बनेगा। साल 2014 में मोदी ने बुनकरों की जिंदगी बदलने के लिए काम करने की बात कही थी। इससे खुश होकर बुनकर समाज का मोदी को जमकर समर्थन मिला। इसी तरह 2019 में भी नरेंद्र मोदी को वाराणसी से हर जाति और धर्म के लोगों का समर्थन हासिल हुआ। 
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राजनीतिक जानकर बताते हैं कि 17वें लोकसभा चुनाव के लिए मोदी की जीत की बड़ी वजह उनकी छवि के साथ ही वाराणसी को लेकर उनका दृष्टिकोण भी रहा। वाराणसी का जिस तरह से कायाकल्प हो रहा है, उससे वाराणसी की जनता विकास को लेकर आशातीत थी। यही वजह है कि जब मोदी इस बार वाराणसी नामांकन भरने गए तो उनका जिस तरह से स्वागत और सत्कार हुआ, वह राजनीतिक इतिहास में अपने आप ही अनोखा था। उसी क्षण और दिन  वाराणसी की जनता ने इस बात के साफ संकेत दे दिए थे कि नरेंद्र मोदी को फिर से जनता का आशीर्वाद मिल रहा है।  23 मई को आए नतीजे में यह साफ संकेत, हकीकत में तब्दील हो गया। 

 

मोदी का वाराणसी में हुए रोड शो की तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
#1 काशी का विकास  
नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पिछले पांच सालों में कई बदलाव आए । घाटों की पहले से ज्यादा साफ-सफाई हुई, साफ-सुथरी सड़कें और रात के वक्त रोशनी का प्रबंध। ये वो चीजें हैं जिन्हें काशी की जनता अपनी अंगुलियों पर गिना सकती है।  हालांकि, काशी के पुरानेपन को बदलने को लेकर पीएम मोदी की आलोचना भी हुई। लेकिन, काशी की जनता ने विकास को ज्यादा तवज्जो दी और मोदी को भारी मतो से जीताया। मोदी ने पिछले पांच सालों में जिस तरह से काशी का सौंदर्यकरण किया, जनता ने उसका आशीर्वाद रूप में उन्हें लौटा दिया। आखिर, नरेंद्र मोदी ने वाराणसी जाते ही सबसे पहले जनता का आशीर्वाद जो मांगा था।

#2 काशी विश्वनाथ गलियारा
नरेंद्र मोदी ने आठ मार्च को काशी विश्वनाथ गलियारा की आधारशिला रखी थी। इस परियोजना के तहत काशी का नवीनीकरण शामिल है। बदलाव पसंद जनता ने मोदी की इस परियोजना को सराहा और यह सराहना वोट बैंक में तब्दील हुई। हालांकि, कई सौ साल पुराने मकानों को तोड़े जाने से कई लोगों को दिक्कत भी हुई और तर्क दिया कि मोदी ने काशी की असली धरोहर उसके पुराने मकानों और गलियों को नष्ट कर दिया है। इनके बिना काशी अधूरी है। लेकिन युवा पीड़ी ने पीएम मोदी की इस परियोजना को हाथों-हाथ लिया और उनकी छवि काशी के विकास पुरुष के रूप में तब्दील हुई, जो 2019 चुनाव के नतीजे के तौर पर देखने को मिली।
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नरेंद्र मोदी
#3 काडर और 'मोदी नाम'
2014 के आम चुनाव में जिस तरह से मोदी लहर चली थी, 2019 में काशी में भाजपा के काडर ने इस लहर को बनाए रखने के लिए जी जान जुटा दी थी। भारतीय जनता पार्टी का काडर काशी में कई महीने पहले से सक्रिय था और पीएम मोदी के विकास और विकास के प्रति उनके दृष्टिकोण को लेकर जनता के बीच जा रहा था। यह भाजपा काडर की ही बदौलत हो पाया कि मोदी जब वाराणसी रोड शो के लिए पहुंचे तो सारा बनारस 'मोदीमय' औऱ 'भगवामय' हो गया। मोदी की जीत की वजह खुद पार्टी से परे उनका नाम भी शामिल है,  जिसे 2014 में 'मोदी लहर' की संज्ञा दी गई थी जिस पर भाजपा ने 2019 में भी चुनाव लड़ा और जीती।
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पीएम मोदी ने कठुआ में रैली को किया संबोधित - फोटो : अमर उजाला
#4 भ्रष्टाचार रहित साफ-सुथरी और राष्ट्रवादी छवि
मोदी की साफ छवि भी उनकी जीत में बेहद निर्णायक साबित हुई। मोदी की छवि काशी ही नहीं बल्कि पूरे भारत में इस तरह की बनी जो न सिर्फ भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त है, बल्कि जिसके लिए राष्ट्र सर्वप्रथम है।  नरेंद्र मोदी बालाकोट हवाई हमले को लेकर जिस तरह पाकिस्तान के खिलाफ मुखर हुए और कांग्रेस को भी राष्ट्रवाद पर घेरा , इससे जनता में उनकी राष्ट्रवादी छवि और ज्यादा मजबूत हुई। इस छवि का भी पीएम मोदी को भरपूर फायदा मिला। इसके अलावा जनता के दिमाग में यह बात भी बैठी की पहली बार कोई पीएम इतनी मुखरता के साथ पाकिस्तान के खिलाफ बोल रहा है। 

# 5 वाराणसी के जातीय समीकण और  मोदी की सर्वमान्यता
2014 लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी ने वाराणसी से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार अरविंद केजरीवाल को 3,71,784 वोटों के अंतर से हराया था।  नरेंद्र मोदी को कुल 5,81,022 वोट मिले थे, जबकि अरविंद केजरीवाल को 2,09,238 मत मिले। इसके बाद इस बार अरविंद केजरीवाल पीएम मोदी को चुनौती देने के लिए वाराणसी नहीं पहुंचे। हालांकि, तेज बहादुर यादव के मैदान में आने को राजनीतिक जानकार वोट कटने के तौर पर देख रहे थे, लेकिन उनका नामांकन ही रद्द हो गया। वाराणसी में हर समाज और जाति के वोटर हैं। यहां पीएम मोदी की जीत में  ब्राह्मण, वैश्य और कुर्मी मतदाता काफी निर्णायक भूमिका में रहे। इससे साफ है कि पीएम मोदी की छवि वाराणसी में किसी जाति व धर्म न बंधकर सर्वमान्य रही और जनता ने एक बार फिर उनके नाम पर अपने मत की मुहर लगाई।
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