चूंकि यह सीधे पीएम मोदी पर वार था, इसलिए भाजपा ने इसका जवाब देने में जल्दबाजी नहीं दिखाई। कई माह इंतजार कर यह देखा गया कि जनता में इसका कैसा प्रभाव है। भाजपा के चुनाव प्रचार की रणनीति तैयार करने वाली टीम के एक पदाधिकारी का कहना है कि 'चौकीदार चोर है' के नारे पर काफी रिसर्च वर्क किया गया था। पार्टी ने इस नारे में बदलाव करने के लिए कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई।
मोदी ने अपनी रैलियों में कहा, मैं तो चौकीदार हूं। देश की रक्षा करना मेरा धर्म है। आपके चौकीदार को चोर कहा जा रहा है। रिसर्च टीम ने उन सभी जगहों पर लोगों की प्रतिक्रिया जानी, जहां पर मोदी ने चौकीदार शब्द का इस्तेमाल किया था।अधिकांश जगहों से यह रिपोर्ट मिलने के बाद कि जनता राहुल गांधी के इस नारे से नाराज नहीं है तो खुश भी नहीं है।
बस इसी रिपोर्ट के बाद मैं भी चौकीदार हूं और नाम के आगे चौकीदार शब्द लगाने की मुहिम शुरू कर दी गई। इसका असर भी खूब देखने को मिला। मोदी ने चौकीदारों से मन की बात की। इसके बाद जनता की राय ली गई तो चौकीदार शब्द मोदी के पक्ष में वोट लाता हुआ दिखाई पड़ा। कांग्रेस पार्टी चुनाव के अंतिम चरण तक इस नारे की मार को समझ नहीं सकी। राहुल अपनी हर जनसभा में ज़ोरशोर से चौकीदार चोर है, बोलने लगे।
पिछले लोकसभा चुनाव में प्रचार के दौरान कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने मोदी को चायवाला कह दिया था। मोदी ने इस नारे की गहराई भांपने में देर नहीं लगाई। उन्होंने कहा, अगर कोई चायवाला देश का प्रधानमंत्री बन रहा है तो इसमें कुछ लोगों को (राजनीतिक दलों) दिक्कत क्यों हो रही है। बाद में यह नारा चल निकला और मोदी प्रधानमंत्री बन गए।
इसके अलावा 'अच्छे दिन आने वाले है', 'मैं देश नहीं मिटने दूंगा और न ही देश को झुकने दूंगा' और 'सबका साथ, सबका विकास' जैसे नारे खूब चले हैं। विपक्षी दलों की ओर से उन्हें मौत का सौदागर' और 'नीच' भी कहा गया, लेकिन मोदी ने इन नारों को अपने फायदे में बदल दिया।