सवाल: भाजपा की महाराष्ट्र में चुनावी तैयारियां कैसी चल रही हैं?
जवाब: आप भी तो महाराष्ट्र में ही घूम रहे हैं। आपने भी देखा होगा कि हम बहुत मजबूती के साथ और अपने सभी सहयोगी दलों के साथ चुनाव में हैं। इस बार हम सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाले हैं।
सवाल: अगर हम गठबंधन से अलग बात करें तो, भारतीय जनता पार्टी की निजी तौर पर क्या रणनीति है?
जवाब: देखिए, हम सब गठबंधन में हैं, तो गठबंधन की बात करते हैं। वैसे भी चुनाव में सभी लोग मोदी मंत्र के साथ में सियासी समर में उतरे हैं। और मोदी मंत्र यही है कि हमें अपने सभी सहयोगियों के साथ मिलकर मजबूती से चुनाव लड़ना है और केंद्र सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचना है।
सवाल: तो आपको लग रहा है कि महाराष्ट्र में मोदी मंत्र काम कर रहा है?
जवाब: अरे, जबरदस्त तरीके से काम कर रहा है। मैं अब तक 32 लोकसभा क्षेत्रों में होकर आया हूं। हर जगह मुझे पिछली बार की तुलना में बहुत ज्यादा ही उत्साह नजर आ रहा है। इसलिए मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि पिछले चुनावों का रिकॉर्ड टूटने जा रहा है।
सवाल: अभी आप बारामती से होकर आए हैं। वहां पर तो पवार वर्सेस पवार की बड़ी लड़ाई चल रही है। किसके हाथ में पावर होगी वहां?
जवाब: बारामती में शरद पवार जी की राजनीतिक पारी तो समाप्त हो चुकी है। वहां पर उनके उत्तराधिकारी अजीत पवार ही हैं। पूरे महाराष्ट्र में मोदी मैजिक चल रहा है। आप सिर्फ एक बारामती की बात पूछ रहे हैं, मैं तो सभी लोकसभा सीटों पर मोदी मैजिक की बात कर रहा हूं।
सवाल: लेकिन भाजपा यहां सभी सीटों पर चुनाव नहीं लड़ रही है। संगठन की मजबूती और कार्यकर्ताओं को किस तरीके से संदेश दिया जा रहा है?
जवाब: हमने महाराष्ट्र की सभी 48 लोकसभा सीटों पर बूथ स्तर पर गठन कर लिया है। इसके अलावा हर बूथ पर पन्ना प्रमुख तक का गठन किया जा चुका है। हमारी जीत का यही सबसे बड़ा मूल मंत्र है। जिस पर हमने पूरी तरह काम कर लिया है। वैसे भी मैंने बताया न की स्पष्ट रूप से सभी 48 सीटों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही चुनाव लड़ रहे हैं। हमारा प्रत्येक कार्यकर्ता भाजपा गठबंधन के लिए मजबूती से सियासी मैदान में डटा है। मोदी मंत्र और मोदी मैजिक का असर दिख रहा है।
सवाल: आप लंबे समय तक शिवसेना के सहयोगी रहे। इस बार महाराष्ट्र की सियासत में दो-दो शिवसेना मैदान में हैं।
जवाब: हम तो आज भी शिवसेना के साथ हैं। बस अंतर यही है कि उद्धव ठाकरे की जो शिवसेना है, वह अब अपने मूल भाव से दूर चली गई है। अब उनके लिए राम भक्त महत्वपूर्ण नहीं रहे हैं। आप उनके भाषण उठा कर देख लीजिए। वह अब नहीं बोलते हैं कि "मेरे प्यारे हिंदू भाइयों एवं बहनों"। क्योंकि उनके लिए अब इन शब्दों का कोई महत्व नहीं बचा है। जब अयोध्या में शिलान्यास हो रहा था, तो उद्धव ठाकरे यहां राम भक्तों पर लाठियां बरसा रहे थे। हनुमान चालीसा पढ़ने वालों को इन्होंने जेल भेज दिया था। यह अब किस मुंह से अपने लोगों के बीच जाएंगे।
सवाल: लेकिन उद्धव ठाकरे की शिवसेना तो कह रही है कि मुझे भारतीय जनता पार्टी से कोई हिंदुत्व के लिए सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है।
जवाब: मैं फिर कहता हूं कि उद्धव ठाकरे ने अपना हिंदुत्व का चोला उतार दिया है। बाकी उनके प्रमाण पत्र का जवाब तो जनता को देना होगा। जो इस लोकसभा के चुनाव में देने वाली है।
सवाल: "वोट जिहाद" को लेकर सियासत गर्म हो गई है। महाराष्ट्र में भी इस मामले पर लगातार प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
जवाब: मैं तो कह रहा हूं कि सपा नेता मारिया आलम खान का वोट जिहाद वाला नारा यहां के धर्मस्थलों से गूंज रहा है। जो बालासाहेब ठाकरे राम भक्त हुआ करते थे, उनके बेटे उद्धव के लिए अब वोट जिहाद की बात की जा रही है। एक धर्म विशेष से फतवा जारी किया जा रहा है। आप देख लीजिएगा अगर ऐसे ही वोट जिहाद के लिए फतवे जारी होते रहे, तो राम भक्त इस बार वोट जिहाद के बदले वोट क्रांति करने जा रहे हैं।
सवाल: आखिरी सवाल, क्या इन्हीं मुद्दों के आधार पर चुनावों में सियासी फील्डिंग सजाई जा रही है?
जवाब: यह बात तो भाजपा ने नहीं कही। इंडिया गठबंधन इस तरीके से माहौल खराब करने की कोशिश कर रहा है। वे जिहाद और फतवे की बात करते रहें, और हम चुपचाप तमाशा देखते रहें। वैसे हमारा चुनाव महाराष्ट्र में मोदी के विकसित भारत के सपने को लेकर हो रहा है। महाराष्ट्र में डबल इंजन की सरकार की ओर से किए जाने वाले विकास को लेकर हो रहा है। लोगों का भरोसा मोदी पर है। हर सीट पर मोदी लड़ रहे हैं।