संसद का मानसून सत्र काफी हंगामे के दौर से गुजर रहा है। इस बीच लोकसभा ने गुरुवार को 76 निरर्थक और अप्रचलित कानूनों को निरस्त करने के लिए एक विधेयक को मंजूरी दे दी। इसको लेकर सरकार ने कहा कि यह कदम जीवन और व्यापार करने में आसानी में सुधार के लिए उसके निरंतर प्रयासों का हिस्सा है।
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विधेयक को विचार के लिए आगे बढ़ाते हुए कहा कि अब तक, मोदी सरकार ने 1,486 कानूनों को निरस्त कर दिया है और एक बार वर्तमान विधेयक को संसद की मंजूरी मिल जाती है, तो कानून की किताबों से हटाए गए कानूनों की संख्या 1,562 हो जाएगी।
पिछले साल दिसंबर में सरकार ने 65 पुराने कानूनों को खत्म करने के लिए निरसन और संशोधन विधेयक पेश किया था। लेकिन बाद के सत्रों में यह बिल चर्चा के लिए नहीं आ सका था। मेघवाल ने कहा कि वह सूची में 11 और विधेयक जोड़ने के लिए एक आधिकारिक संशोधन पेश कर रहे हैं, जिससे कुल विधेयक 76 हो जाएंगे।
उन्होंने कहा, संशोधन के माध्यम से जोड़े गए 11 विधेयक औपनिवेशिक युग के कानून हैं। उन्होंने कहा कि पुराने कानूनों को निरस्त करके जीवन को आसान बनाने के लिए सरकार अपने प्रयास कर रही है। मंत्री ने पिछली यूपीए सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पिछली सरकारों में इन सब पर कभी ध्यान नहीं दिया गया और ऐसे कानूनों को निरस्त नहीं किया गया।
विकलांग लोगों के लिए दिशानिर्देशों पर उठे सवाल
सरकार ने गुरुवार को कहा कि ग्यारह मंत्रालयों ने अभी तक विकलांग लोगों के लिए अपने क्षेत्र-विशिष्ट पहुंच दिशानिर्देशों को अंतिम रूप नहीं दिया है। यह जानकारी सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा सामाजिक न्याय और अधिकारिता पर संसदीय स्थायी समिति के साथ साझा की गई थी।
संसदीय पैनल की रिपोर्ट गुरुवार को लोकसभा में पेश की गई। मंत्रालय ने कहा कि कानून और न्याय, उपभोक्ता मामले और दूरसंचार विभाग विकलांग लोगों से संबंधित अपने डोमेन से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालयऔर आवास और शहरी मामलों का मंत्रालय के दिशानिर्देशों का पालन कर रहे हैं।
1.69 लाख मामले फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतों द्वारा निपटाए गए: सरकार
देश की 750 से अधिक फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतों ने 1.69 लाख मामलों का निपटारा किया है। वहीं, 1.95 लाख से अधिक लंबित हैं। गुरुवार को राज्यसभा में एक सवाल के लिखित उत्तर में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने ये जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इनमें से, यौन अपराधों से बच्चों की विशेष सुरक्षा (POCSO) अदालतों ने 1.08 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया, जबकि 1.30 लाख से अधिक मामले लंबित हैं।
महिला आरक्षण विधेयक के लिए आम सहमति आवश्यक है: सरकार
सरकार ने गुरुवार को राज्यसभा में कहा कि महिला आरक्षण विधेयक को संसद में लाने से पहले सभी राजनीतिक दलों के बीच आम सहमति के आधार पर सावधानीपूर्वक विचार करने की आवश्यकता है। एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि लैंगिक न्याय सरकार की एक महत्वपूर्ण प्रतिबद्धता है।
उन्होंने कहा कि संविधान में संशोधन के लिए विधेयक संसद में लाने से पहले सभी राजनीतिक दलों के बीच आम सहमति के आधार पर इस मुद्दे पर सावधानीपूर्वक विचार करने की जरूरत है। बता दें कि महिला आरक्षण विधेयक में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 15 वर्षों के लिए महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है।
परिवेश पोर्टल से मंजूरी की आवश्यकता वाली परियोजनाओं की जानकारी नहीं हटाई जाती:केंद्र
सरकार ने संसद को बताया कि वह परिवेश पोर्टल से मंजूरी की आवश्यकता वाली परियोजनाओं से संबंधित जानकारी नहीं हटाती और कहा कि उसने वास्तव में मंजूरी देने की प्रक्रिया को पारदर्शी बना दिया है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव ने सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए कहा, मंत्रालय उन परियोजनाओं से संबंधित कोई भी जानकारी नहीं हटाता है, जिनके लिए मंजूरी की आवश्यकता होती है। केरल से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के बिनॉय विश्वम के एक प्रश्न का उत्तर देते हुए यादव ने राज्यसभा को बताया कि परिवेश पोर्टल पर्यावरण नीति प्रसार के लिए एक मंच और प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से क्लियरेंस प्रक्रिया को सुव्यवस्थित और तेज करने के साधन के रूप में कार्य करता है। उन्होंने बताया, पोर्टल हितधारकों को विभिन्न परियोजना-संबंधित विवरणों तक पहुंचने की अनुमति देता है।
सड़कों की गुणवत्ता से समझौता अस्वीकार्य: संसदीय समिति
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी कई सड़कों की खराब गुणवत्ता को लेकर एक संसदीय समिति ने कहा है कि यह पूरी तरह अस्वीकार्य है। समिति ने सुझाव दिया कि योजना के तहत सड़कों की मोटाई मौजूदा 20 मिमी से बढ़ाकर 30 मिमी की जानी चाहिए। लोकसभा में बृहस्पतिवार को पेश की गई अपनी रिपोर्ट में, ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग से संबंधित स्थायी समिति ने योजना को ठीक से लागू करने के लिए बेहतर केंद्र-राज्य सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
आईजीएनसीए ने तैयार की थी सेंगोल पर वृत्तचित्र
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने राज्यसभा को बताया कि सेंगोल पर वृत्तचित्र इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) ने तैयार की थी। इसके उत्पादन की लागत समग्र कार्य का हिस्सा थी। सरकार का दावा है कि यह सेंगोल ब्रिटिश काल में सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक रहा है। सरकार के दावे का आधार सरकारी रिकॉर्ड, संस्थागत स्मृति और समसामयिक मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। सेंगोल को 28 मई को नए संसद भवन के लोकसभा कक्ष में रखा गया था, इसे चोल साम्राज्य के दौरान सत्ता के हस्तांतरण का प्रतीक माना जाता था।