सासाराम लोकसभा क्षेत्र की पहचान पूर्व उपप्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम से रही है या यूं कहें कि जगजीवन राम व सासाराम एक-दूसरे के पर्याय रहे हैं। जगजीवन राम आजीवन सासाराम आरक्षित सीट से निर्वाचित होते रहे। 1984 में जब पूरे देश में कांग्रेस के पक्ष में हवा चल रही थी, तब भी वे अपनी पार्टी आईसीजे से लगातार आठवीं बार विजयी हुए थे। उनके निधन के बाद छेदी पासवान जनता दल के टिकट पर पहली बार 1989 में निर्वाचित हुए। फिलहाल वे यहां से भाजपा सांसद हैं।
जगजीवन राम के बाद सासाराम तब चर्चा में आया, जब 2009 में मीरा कुमार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुई। पिछले साल राष्ट्रपति के चुनाव में मीरा कुमार यूपीए की उम्मीदवार बनाई गई थीं, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 2014 के लोकसभा चुनाव में मीरा कुमार को छेदी पासवान ने हराया था। इस बार फिर मीरा कुमार की उम्मीदवारी के कारण यह चर्चित सीट बनी हुई है। जगजीवन राम ने इस संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व 1952 की पहली लोकसभा से आठवीं लोकसभा 1984 तक किया था। वे 1977 में बनी गैर कांग्रेसी सरकार (जनता पार्टी) में उप प्रधानमंत्री बने, मगर बाद में फिर कांग्रेस में लौट आए थे।
आईएफएस की नौकरी छोड़कर संभाली थी पिता की विरासत
वर्ष 1986 में जगजीवन राम के निधन के बाद उनकी बेटी आईएफएस अफसर मीरा कुमार ने विदेश सेवा की नौकरी से त्यागपत्र देकर पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने-संभालने के लिए 1989 में पहली बार यहां से चुनाव लड़ा। हालांकि वह स्थानीय नेता छेदी पासवान से हार गईं। तब मीरा कुमार ने सासाराम संसदीय क्षेत्र से मुंह मोड़ लिया। मगर, 2004 में फिर सासाराम से लड़ीं और लोकसभा पहुंचीं। 2009 में फिर जीतीं और 15वीं लोकसभा की अध्यक्ष बनाई गईं।
पिछले चुनाव में हार गई थीं मीरा
2014 में मीरा कुमार छेदी पासवान से चुनाव हार गईं। जदयू से भाजपा में आने वाले छेदी को 2014 में 3,66,087 और मीरा कुमार को 3,02,760 मत मिले थे। 1996, 1998, 1999 में भाजपा के मुनिलाल लगातार चुनाव जीते थे।
छह विधानसभा क्षेत्र
सासाराम लोकसभा क्षेत्र में छह विधानसभा सीटें मोहनिया, भभुआ, चौनपुर, चेनारी, सासाराम और करहगर हैं।
छेदी पासवान
मौजूदा सांसद छेदी पासवान यहां से तीन बार संसद पहुंच चुके हैं। कहते हैं कि जगजीवन राम 40 साल सांसद रहे, लेकिन विकास के लिए कुछ नहीं किया।
गेट-वे ऑफ बिहार
सासाराम को गेट-वे ऑफ बिहार भी कहा जाता है। यह अशोक स्तंभ के लिए भी प्रसिद्ध है। यह अपने समय की कला का श्रेष्ठतम नमूना है। इसी जिले में शेरशाह सूरी का मकबरा है।
क्या है जातीय गणित
इस संसदीय क्षेत्र में मतदाताओं में सबसे बड़ी संख्या दलितों की है। दलितों में मीरा कुमार की जाति रविदास पहले नंबर पर। ब्राह्मण, राजपूत व मुसलमानों के वोटर डेढ़-डेढ़ लाख के आसपास हैं। अतिपिछड़ी जातियों के वोटर पौने दो लाख के आसपास हैं।