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वाराणसी सीट का सियासी इतिहास, 16 आम चुनाव में एक बार भी नहीं जीती सपा-बसपा

Wed, 01 May 2019 02:38 PM IST
ललित फुलारा चुनाव डेस्क, अमर उजाला
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वाराणसी लोकसभा सीट
वाराणसी उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से सबसे हाई-प्रोफाइल सीट है। साल 2019 के 17वें लोकसभा चुनाव में सबकी नजरें इस सीट पर हैं। यहां से भाजपा उम्मीदवार के तौर पर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किस्मत दांव पर है। पीएम मोदी के खिलाफ सपा-बसपा गठबंधन ने बीएसएफ के पूर्व जवान तेज बहादुर को मैदान में उतारा है। दूसरी तरफ कांग्रेस से अजय राय मैदान में हैं। साल 2014 में इस सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंपर वोटों के साथ जीत हासिल की थी। पीएम मोदी ने आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल को करीब 3.37 लाख वोटों से हराया था। वाराणसी में 19 मई को आखिरी चरण में मतदान होना है। 2014 के आम चुनाव में वाराणसी में कुल मतदाताओं की संख्या 1,767,486 थी। इसमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 986,224 और महिला मतदाता की संख्या 781,262 थी। उस वक्त इस निर्वाचन क्षेत्र में 58.31%  फीसदी मतदान हुआ था। आइए इस सीट के सियासी समीकरणों पर एक नजर डालते हैं.. 
 
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वाराणसी लोकसभा क्षेत्र के तहत पांच विधानसभा क्षेत्र आते हैं। ये रोहणिया, वाराणसी उत्तरी, वाराणसी दक्षिण, वाराणसी छावनी और सेवापुरी हैं। इनमें से एक भी सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित नहीं है।जब देश में 1951-52 में पहली बार आम चुनाव हुए थे उस वक्त वाराणसी जिले में लोकसभा की 3 सीटें थी। ये सीटें बनारस मध्य, बनारस पूर्व और बनारस-मीरजापुर थी। साल 2014 के बाद वाराणसी सीट का राजनीतिक महत्व काफी बढ़ गया है।
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पीएम मोदी, डॉ मुरली मनोहर जोशी
2014 से पहले 2009 में भी यह सीट भाजपा के ही कब्जे में थी। 2009 का चुनाव इस सीट से भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने जीता था। 2014 में उन्होंने इस सीट को मोदी के लिए छोड़ा था। पहले आम चुनाव में वाराणसी से कांग्रेस के रघुनाथ शर्मा ने सोशलिस्ट पार्टी के विश्वनाथ शर्मा को चुनाव हराया था। अगली स्लाइड में पढि़ए कौन-सी पार्टी इस सीट से कितनी बार जीती

 

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नरेंद्र मोदी - फोटो : ani
अब तक 16 लोकसभा चुनावों का हिसाब लगाया जाए तो वाराणसी सीट से सात बार कांग्रेस और छह बार भाजपा जीती है। इसके अलावा यहां से एक-एक बार जनता दल और सीपीएम उम्मीदवार को भी जीत नसीब हुई है। वहीं, भारतीय लोकदल ने भी इस सीट पर एक बार जीत हासिल की है जबकि, समाजवादी पार्टी और बसपा ने इस सीट पर अभी तक कभी भी जीत दर्ज नहीं की है। 

 
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पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर
वाराणसी लोकसभा सीट से कई दिग्गज नेता चुनाव जीतकर आए हैं। इनमें पूर्व प्रधानमंत्री चंद्र शेखर से लेकर यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी शामिल हैं। इस सीट से मुरली मनोहर जोशी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बेटे अनिल शास्त्री भी विजयी रहे हैं। 
 
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वाराणसी
साल 2017 के विधानसभा चुनाव में वाराणसी क्षेत्र की पांच में से चार विधानसभा सीट भाजपा के खाते में गई थी। जबकि, एक सीट सेवापुरी भाजपा के सहयोगी दल अपना दल ने जीती थी। अगर बनारस के जातीय समीकरणों की बात करें तो यहां कुर्मी समाज के मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा है। रोहनिया और सेवापुरी में कुर्मी मतदाता काफी संख्या में हैं। इसके अलावा ब्राह्मण और भूमिहार वोटर्स की भी अच्छी खासी तादाद है। वाराणसी के लिए वैश्य, यादव और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या भी जीत के लिए निर्णायक साबित होती है।
 
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वाराणसी - फोटो : ani
वाराणसी से 1957 के आम चुनाव में कांग्रेसी नेता रघुनाथ सिंह सांसद चुने गए। 1962 में भी जनता ने रघुनाथ सिंह को ही विजयी बनाया। 1967 में यहां से पहली बार सीपीएम के सत्य नारायण सिंह ने चुनाव जीता। 1971 में कांग्रेस के राजाराम शास्त्री सांसद बनें। 1977 में कांग्रेस विरोधी लहर की बदौलत वाराणसी से चन्द्र शेखर चुनाव जीते। 1980 में कमलापति त्रिपाठी वाराणसी सीट से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। 1989 में इस सीट से पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बेटे अनिल कुमार शास्त्री ने चुनाव जीता। 2009 में बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी इलाहाबाद से वाराणसी चुनाव लड़ने आए और चुनाव जीते भी।  इसके बाद साल 2014 में वाराणसी ने नरेंद्र मोदी को संसद पहुंचाया। इस बार देखना है कि वाराणसी की जतना किसे चुनती है।
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