वह कहते हैं कि शायद यही कारण है कि बिश्नोईयों की राज्य में संख्या दो प्रतिशत से भी कम है और इतना जातिवाद होने के बावजूद भजन लाल तीन बार मुख्यमंत्री बने। वहीं दूसरी ओर देवी लाल और फिर ऐसे ही ओम प्रकाश चौटाला अपने प्रतिद्वंद्वियों को न तो भूलते थे न ही खुश करने की कोशिश करते थे। देवी लाल दो बार और चौटाला चार बार मुख्यमंत्री बने। सवाल यह है कि क्या वही प्रतिद्वंद्विता फिर से दोनों परिवारों के युवा पीढ़ी के बीच में दिखने वाली है या फिर वक्त के साथ चीजें बदली हैं?
जेजेपी के दुष्यंत चौटाला ने बीबीसी से बातचीत में बताया कि राजनीति में कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं होता तो भजन लाल के पोते को वो बस एक और उम्मीदवार की तरह ही ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि यहां तो जो सबसे काबिल है वही रहता है। मेरे लिए वो एक ऐसी पार्टी (कांग्रेस) के उम्मीदवार हैं जिसने दस साल तक अपने राज में लोगों को बहुत लूटा। ठीक वैसे ही जैसे बीजेपी के उम्मीदवार बृजेंद्र सिंह है जिनकी पार्टी ने लोगों को जातपात के नाम पर बांटने का काम किया। वैसे पिछले चुनाव में दुष्यंत ने भव्य के पिता कुलदीप बिश्नोई को हिसार में ही हराया था लेकिन भव्य का कहना है कि उनके सामने दुष्यंत कोई चुनौती नहीं हैं।
कौन हैं भव्य बिश्नोई
महज 26 वर्षीय भव्य ने बताया कि वो लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और फिर आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़े हैं। भव्य का छोटा भाई चैतन्य बिश्नोई क्रिकेटर हैं और आईपीएल में चेन्नई की टीम से खेलते है। उनकी एक छोटी बहन भी है। वे कहते हैं कि लोगों को उम्मीद थी कि दुष्यंत देश के सबसे युवा सांसद बने हैं पर वो कुछ कर ही नहीं पाए जिससे पूरा हिसार उनसे निराश है। पूछे जाने पर कि क्या अपने दादा भजन लाल जो गैर जाटों के 'आइकन' माने जाते थे, उन्हीं की तरह वो भी गैर जाटों के समर्थन की उम्मीद कर रहे हैं, तो उन्होंने दावा किया कि मैं जात-पात में विश्वास नहीं करता और मुझे विश्वास है कि मुझे सभी लोगों से समर्थन मिलेगा।
वैसे रविवार को भव्य को टिकट मिलना काफी नाटकीय रहा। टिकट मिलने से पहले ही जिंदल हाउस ने भव्य के प्रत्याशी होने का एलान कर दिया था। पूर्व मंत्री और पार्टी की वरिष्ठ नेता सावित्री जिंदल ने दोपहर को ही इसके बारे में ट्वीट कर दिया जो सोशल मीडिया पर काफी फैला भी जबकि टिकट की सूची रात को जारी की गई। मुकाबला कठिन है। पिछली बार जीतने के बाद दुष्यंत अब तजुर्बेकार नेता हैं वहीं आईएएस छोड़ कर राजनीति में आए बीजेपी के बृजेंद्र सिंह एक सशक्त दावेदार हैं। जाहिर है कि राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले अपनी नज़रें खास तौर पर हिसार पर गड़ाए बैठे हैं।