भाजपा के केन्द्रीय कार्यालय पर आईटी सेल के 15 लोगों की एक विशेष टीम काम कर रही है जो देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग भाषाओं की जरूरतों के हिसाब से कंटेंट तैयार कर रही है। इनके नीचे ग्राफिक डिजाइनर और वीडियो एडिटर रखे गये हैं जो किसी कंटेंट को लोगों की रुचि के हिसाब से अंतिम रूप दे रहे हैं। बूथ स्तर का काम सबसे प्रमुख हैं। इसके अलावा राज्य, पार्टी के जोन, जिला, लोकसभा क्षेत्र और मंडल स्तर पर सोशल मीडिया प्रमुखों की नियुक्ति की गई है। नेता के मुताबिक सबसे महत्त्वपूर्ण भूमिका बूथ स्तर पर नियुक्त सोशल मीडिया प्रमुख की है। किसी भी बूथ पर औसतन एक हजार से बारह सौ वोट होते हैं। बूथ स्तर के कार्यकर्ता को कम से कम पांच व्हाट्सएअप ग्रुप बनाने के लिए कहा गया है। एक व्हाट्सएप ग्रुप में अधिकतम 256 सदस्य हो सकते हैं।
इस प्रकार पांच व्हाट्सएप ग्रुप में बूथ के हर परिवार, हर वोटर और हर सक्रिय स्मार्ट फोन यूजर तक पार्टी की पहुंच हो जाएगी। पार्टी की रणनीति है कि सरकार की योजनाएं लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बन जाएं। व्हाट्सएप इसमें प्रमुख भूमिका निभा रहा है। पार्टी का विचार है कि इसके माध्यम से लोगों तक वे सभी संदेश पहुंचाए जा सकें जो मोदी सरकार ने पिछले पांच सालों में किये हैं। लाभार्थियों की जानकारी पास पड़ोस के सभी लोगों को दी जा सके जिससे वे सरकार के सकारात्मक प्रयासों को समझें और सरकार की वापसी के लिए वोट करें।
व्हाट्सएप पूरी दुनिया की तरह भारत में भी बहुत तेजी से लोकप्रिय हुआ है। एक आंकड़े के मुताबिक पिछले लोकसभा चुनाव यानी 2014 में भारत में व्हाट्सएप के 5 करोड़ सक्रिय उपयोगकर्ता थे। फरवरी 2017 तक व्हाट्सएप का इस्तेमाल करने वालों की संख्या चार गुना बढ़कर 20 करोड़ हो चुकी थी। ध्यान रहे कि यह संख्या पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिले कुल वोटों की संख्या (लगभग साढ़े 17 करोड़) से भी ज्यादा है। इसी से समझा जा सकता है कि पार्टी ने व्हाट्सएप को इतनी अहमियत क्यों दे रखी है।