महिला लोको पायलटों की खराब कार्य स्थितियों के खिलाफ अखिल भारतीय लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन ने आवाज तेज कर दी है। बीते 24 जून को तमिलनाडु के एरोड में हुए सम्मेलन में महिला कर्मचारियों की 9 प्रमुख मांगें रखी गईं, जिनमें ड्यूटी के दौरान शौचालय, गर्भावस्था में छुट्टी, बेहतर आरामगाह और रेलवे अस्पतालों में महिला डॉक्टर की तैनाती शामिल हैं।
ट्रनों में महिला लोको पायलटों के लिए बेहतर और साफ-सुथरा कार्यस्थल की मांग लगातार से तेज हो रही है। इसके लिए अखिल भारतीय लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (एआईएलआरएसए) ने विरोध तेज करने का फैसला किया है। उन्होंने महिलाओं के लिए राष्ट्रीय सम्मेलन बुलाने की घोषणा की है। साथ ही एसोसिएशन ने नौ अहम मांगें रखीं हैं, जिनमें ड्यूटी के दौरान शौचालय सुविधा, गर्भावस्था में अनिवार्य छुट्टियां, आराम की बेहतर सुविधाएं और रेलवे अस्पतालों में रोजाना स्त्रीरोग विशेषज्ञ की नियुक्ति शामिल है।
हालांकि बढ़ते विरोध प्रदर्शन के बीच रेलवे मंत्रालय ने कहा कि उन्होंने हाल ही में पुरुष और महिला दोनों लोको पायलटों के कामकाज को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। 900 से ज्यादा लोकोमोटिव में वॉटरलेस यूरीनल और 7,000 से अधिक में एयर कंडीशनिंग लगाई गई है। आउटस्टेशन में आराम के लिए सभी रनिंग रूम एयर कंडीशन्ड कर दिए गए हैं।
सम्मेलन में रेलवे प्रबंधन के रवैये की हुई कड़ी निंदा
बता दें कि एआईएलआरएसए ने बीते 24 जून को तमिलनाडु के एरोड में महिला लोको पायलटों का सम्मेलन आयोजित किया, जिसमें छह डिवीजनों से 25 महिला प्रतिनिधि शामिल हुईं। सम्मेलन में महिला कर्मचारियों की खराब कार्य परिस्थितियों और रेलवे प्रबंधन के रवैये की कड़ी निंदा की गई, जिसने 11 महिलाओं को नौकरी छोड़ने पर मजबूर किया।
मासिक धर्म के दिनों में छुट्टी की भी मांग
इसके अलावा एआईएलआरएसए ने महिला रेलवे कर्मचारियों के लिए कई जरूरी मांगें की हैं। उन्होंने कहा है कि हर ट्रेन बुकिंग पॉइंट पर महिलाओं के लिए अलग क्रू रूम और साफ-सुथरे शौचालय बनाए जाएं। साथ ही, हर जगह ‘आंतरिक शिकायत समिति’ के सदस्यों के नाम भी दिखाए जाएं ताकि महिलाएं अपनी समस्याएं आसानी से बता सकें।
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