केरल के त्रिशूर में एक सहकारी बैंक में ऋण धोखाधड़ी सहित बड़ी अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। सहकारिता विभाग द्वारा की गई विभागीय जांच के बाद यह बात सामने आई, जिसके बाद से सीपीआई (एम) की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दरअसल, यह बैंक सत्तारूढ़ एलडीएफ के निर्वाचित सदस्यों द्वारा चलाया जाता है। यह घटना तब सामने आई जब 14 जुलाई को पुलिस में एक शिकायत दर्ज कराई गई, जिसमें कहा गया था कि एक ही जमानत पर कई ऋण प्रदान किए गए थे। पुलिस को करुवन्नूर सेवा सहकारी बैंक में करीब 100 करोड़ रुपये के कर्ज घोटाले का संदेह है।
12 सीपीएम सदस्यों वाली बैंक की संचालन समिति भंग
एक रिपोर्ट के अनुसार करुवन्नूर सेवा सहकारी बैंक में 2014-2020 के बीच वित्तीय गड़बड़ी हुई है। घोटाले का विवरण सार्वजनिक होने के बाद 12 सीपीएम सदस्यों वाली बैंक की संचालन समिति को भंग कर दिया गया है। बता दें इस मामले में बैंक के पूर्व प्रबंधक एम के बीजू इस घोटाले में मुख्य संदिग्ध हैं। प्राथमिकी में पूर्व बैंक सचिव सहित पांच अन्य लोगों के नाम संदिग्ध हैं। आईपीसी की धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात के लिए सजा), 420 (धोखाधड़ी), 409 (लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात), और 465 (जालसाजी के लिए सजा) के तहत मामला दर्ज किया गया है। अब यह मामला राज्य की अपराध शाखा को सौंप दिया गया है।
50 लाख रुपये से अधिक के ऋणों के वितरण में अनियमितताएं
इरिंगलाकुड़ा सहकारी सहायक रजिस्ट्रार द्वारा एक विभागीय जांच में 50 लाख रुपये से अधिक के ऋणों के वितरण में अनियमितताएं पाई गईं। जानकारी के अनुसार जब लोग ऋण के लिए बैंक से संपर्क करते थे, तो उनकी जमानत का उपयोग अधिक राशि स्वीकृत करने के लिए किया जाता था। इसके बाद अंतर को संदिग्धों के खातों में भेज दिया गया।
बचाव की मुद्रा सीपीआई (एम)
इधर, गबन का विवरण सामने आने के बाद से सीपीआई (एम) बचाव की मुद्रा में है। इस मामले को 2018 में हरी झंडी दिखाई गई थी और पार्टी ने एक जांच समिति का गठन किया था। हालांकि, पिनाराई विजयन सरकार ने कथित तौर पर माकपा नेताओं की संलिप्तता के कारण अपराध को छुपाने की कोशिश की। सीपीआई (एम) त्रिशूर के जिला सचिव का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ पार्टी स्तर पर कार्रवाई की जाएगी क्योंकि उन्हें अब जांच समिति की रिपोर्ट मिल गई है।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
इस बीच, विपक्ष ने मामले को रफा-दफा करने की कोशिश को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस विधायक वी डी सतीसन ने आरोप लगाया कि बैंक के कर्मचारियों द्वारा धन का दुरुपयोग त्रिशूर जिले में माकपा के समर्थन से किया गया था। उन्होंने आगे दावा किया कि पार्टी को धोखाधड़ी के बारे में पता था, लेकिन वह पुलिस को इसकी रिपोर्ट करने के लिए तैयार नहीं थी।