महाराष्ट्र के कई हिस्सों में कम बारिश के कारण किसानों को बहुस सी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इन्हीं समस्याओं में से एक है पशुधन की मात्रा में कमी होना। जो कि सामान्य से भी आधी हो गई है। जलगांव के नांदेड से क्रॉप्स प्रोटेक्शन कमिटि के अध्यक्ष राजेंद्र अतारदे का कहना है कि जो गाय पहले 20-22 हजार रुपये में बिकती थी वह अब 8-10 हजार में बिक रही है। नांदेड को राज्य में एक बड़ा पशु बाजार माना जाता है।
वहीं एक हाईब्रिड और जर्सी गाय अब केवल 30-35 हजार रुपये में बिक रही है। जबकि पहले यह 55-70 हजार रुपये में बिकती थी। ऐसा नहीं है कि गाय के दाम में ही कमी आई है। भैंस की कीमतों पर भी प्रभाव पड़ा है। जो भैंस पहले 1-1.25 लाख रुपये के बीच में बिकती थी, वह अब 55-70 हजार रुपये में बिक रही है। अतारदे का कहना है कि ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि राज्य के बड़े हिस्से में इस बार कम बारिश हुई है।
पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान कॉलेज के प्रोफेसर का कहना है कि पशुधन की कीमतें बहुत कम हो गई हैं। और ऐसा रातोंरात हुआ है। राज्य कृषि विभाग के मुताबिक मराठवाड़ा, उत्तरी महाराष्ट्र और विदर्भ के कई भाग सूखे का सामना कर रहे हैं। यहां सामान्य से 23 फीसदी तक कम बारिश हुई है। अभी तक राज्य सरकार ने औपचारिक रूप से सूखे की घोषणा नहीं की है और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का कहना है कि फैसला इस महीने के आखिर तक ले लिया जाएगा।
कृषि विकास का काम देखने वाले अतुल नेमादे का कहना है कि 'पशु अब ज्यादा महंगे नहीं रहे। खरीफ की फसल भी इस साल तबाह हुई है। किसानों को खेती का महज 60 फीसदी ही प्राप्त हुआ है। रबी की फसल के लिए भी अब कोई आस नहीं है क्योंकि सिंचाई के लिए पानी ही नहीं है। किसानों के पास बाजार से चारा खरीदने तक के पैसे नहीं हैं। क्योंकि वह काफी महंगा है। इंसानों को ही हफ्ते में एक बार पानी मिल रहा है तो फिर जानवरों का क्या हाल होगा। इसी कारण से बहुत से किसान अपने पशुओं को बेच रहे हैं क्योंकि वह उन्हें बुरी हालत में नहीं देख सकते।'
किसानों का कहना है कि सरकार भी दूध के दाम नहीं बढ़ा रही है। जबकि चारे के दाम आसमान छू रहे हैं। किसानों को कहा जा रहा है कि वह 27 रुपये प्रति लीटर दूध बेचें जबकि वह 37 रुपये प्रति लीटर बेचना चाहते हैं। किसान इस समय बेहद चिंता में हैं। पहले एक दिन में 300-500 पशु बिका करते थे लेकिन अब 3 हाजर पशु बिक रहे हैं।