भारत में नेशनल हाईवे पर शराब बैन के बाद देश के उन सभी बड़े होटल्स और पबों को भी शराब न बेचने के लिए बाध्य किया जा रहा है जो कि हाईवे के नजदीक हैं। अनुमान के मुताबिक बताया जा रहा है कि इस बड़े फैसले की वजह से राज्य सरकारों और हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री को 65 हजार करोड़ के राजस्व की चपत लग सकती है।
नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रमुख रियाज अमलानी का कहना है कि अनुमान के तौर पर इस फैसले से राज्यों को टैक्स राजस्व में 50 हजार करोड़ रूपये का झटका लग सकता है। वहीं रेस्त्रां और पब्स को 10 से 15 हजार रुपये का नुकसान हो सकता है। हम सटीक आंकड़ों के आंकलन में लगे हुए हैं।
रियाज अमलानी कहते हैं कि 1 लाख लोगों के रोजगार पर भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश से संकट है। इन सबसे अलग रोजगार में लगे लोगों को अपना पुराना स्टॉक भी ठिकाने लगाना है। एनआरएआई एक लॉबी ग्रुप है जो कि देश के भीतर मौजूद रेस्त्रां और पब्स का प्रतिनिध्व करता है।
नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत का कहना है कि इस फैसले से लोगों के रोजगार पर संकट है। पर्यटन रोजगार पैदा करता है, क्यों इन अवसरों को खत्म किया जा रहा है। उन्होंने ट्वीट के जरिए कहा कि हाईवे पर शराब बैन से 10 लाख लोगों के रोजगार पर भी संकट है।
सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल और स्टेट हाईवे से 500 मीटर की दूरी तक सभी होटल्स और रेस्त्रां में शराब परोसे जाने पर 1 अप्रैल से पाबंदी लगा रखी है। कोर्ट ने ये आदेश सड़क हादसों में बढ़ती संख्या की वजह से लिया है। यूनाईटेड वेबरेज के प्रबंध निदेशक शेखर राममूर्ति ने कहा कि इस बैन से हमारे व्यवसाय पर भी असर पड़ेगा।