डिवाइस कंपनी के पुनीत सिन्हा ने बताया कि वेयर हाऊस से निकले ट्रक में डिवाइस मौजूद रहेगी। यहां से निकलने के बाद जितनी बार भी ट्रक का तापमान कम या ज्यादा होगा, ये डिवाइस रिकॉर्ड करेगी। अगर ट्रक दरवाजा खुलेगा और अंदर रोशनी पहुंचते ही ये डिवाइस लाल रंग का अलर्ट देने लगेगी। इतना ही नहीं जब ये डिवाइस डीलर तक पहुंचेगी तो दिल्ली में बैठे पता चलेगा कि डीलर ने भी नियमों का पालन किया है अथवा नहीं। यानि कि वेयर हाऊस से निकलने के बाद जनऔषधि केंद्र तक दवा के पहुंचने पर नजर रखी जाएगी। एक बार में ये डिवाइस 12 हजार डाटा सुरक्षित रख सकती है। बैटरी लगातार दो वर्ष तक चल सकती है।
हर कंपनी के लिए लागू हो सकते हैं नियम
सूत्रों की मानें तो पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर सरकार जेनेरिक दवाओं पर फिलहाल इस डिवाइस का प्रयोग कर रही है। कुछ माह बाद इसके परिणाम देखने के बाद फॉर्मास्यूटिकल कंपनियों को इसका इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया जाएगा। इसके लिए बकायदा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने योजना भी तैयार की है।