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अमेरिका की तरह अब भारत में भी जेनेरिक दवाओं की होगी ट्रैकिंग

Fri, 24 Aug 2018 06:36 AM IST
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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दवाओं को लेकर इनदिनों चल रही घपलेबाजी को रोकने के लिए सरकार ने अब नया तोड़ निकाला है। जेनेरिक के नाम पर नकली दवाएं बेचना और तापमान के नियमों की पालना नहीं करने वालों के खिलाफ सरकार ने एक डिवाइस तैयार किया है।

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इस टू लेयर तकनीक के जरिए जेनेरिक दवाओं की घपलेबाजी रोकने का दावा है। ये एक ट्रैकिंग डिवाइस है, जो तापमान के साथ रोशनी की पहचान भी करेगा। यानि दवा का डिब्बा कितने तापमान पर रहा और कितनी बार इसे खोल गया, इसकी जानकारी दिल्ली तक मिलेगी। प्रधानमंत्री जनऔषधि परियोजना (पीएमभाजप) के तहत सरकार इस ट्रैकिंग को अब शुरू करने जा रही है। दरअसल ये अमेरिकी वैज्ञानिकों द्वारा तैयार की गई तकनीक है, जिसे अब पूरी दुनिया में प्रयुक्त किया जा रहा है।      

पीएमभाजप के सीईओ सचिन कुमार सिंह बताते हैं कि वैक्सीन, इंजेक्शन से लेकर कई तरह की दवाएं ऐसी होती हैं, जिन्हें माइनस 2 से लेकर माइनस 20 के तापमान पर रखना पड़ता है। मगर जब दवाएं वेयर हाऊस से दूरदराज स्थित डीलर तक पहुंचती है तो इस बीच इन दवाओं का तापमान क्या रहा? इसके बारे में किसी के पास जानकारी नहीं होती।
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इसका परिणाम यह होता है कि मरीज तक पहुंचते पहुंचते ये दवा या वैक्सीन पानी की तरह हो जाती है। साथ ही कई बार देखने को मिलता है कि वेयर हाऊस से निकलने के बाद दवाओं को बदल दिया जाता है। इन्हीं घपलेबाजी को रोकने के लिए जेनेरिक दवाओं के साथ इस ट्रैकिंग डिवाइस को जोड़ा है।             

दिल्ली से पूरे देश में जा रहीं जेनेरिक दवाएं

दरअसल अभी तक देश में जेनेरिक दवाओं को लेकर सरकार का एकमात्र वेयर हाऊस मानेसर में है। यहीं से पूरे देश में दवाएं आपूर्ति की जा रही है। इसलिए सरकार ने वेयर हाऊस से निकलने वाले सभी ट्रकों के अंदर मौजूद दवाओं में से किसी एक बॉक्स में ये डिवाइस को चिपकाया जाएगा। वॉटर प्रुफ होने की वजह से इसका इस्तेमाल आसान है।      

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ऐसे काम करेगी ये डिवाइस

डिवाइस कंपनी के पुनीत सिन्हा ने बताया कि वेयर हाऊस से निकले ट्रक में डिवाइस मौजूद रहेगी। यहां से निकलने के बाद जितनी बार भी ट्रक का तापमान कम या ज्यादा होगा, ये डिवाइस रिकॉर्ड करेगी। अगर ट्रक दरवाजा खुलेगा और अंदर रोशनी पहुंचते ही ये डिवाइस लाल रंग का अलर्ट देने लगेगी। इतना ही नहीं जब ये डिवाइस डीलर तक पहुंचेगी तो दिल्ली में बैठे पता चलेगा कि डीलर ने भी नियमों का पालन किया है अथवा नहीं। यानि कि वेयर हाऊस से निकलने के बाद जनऔषधि केंद्र तक दवा के पहुंचने पर नजर रखी जाएगी। एक बार में ये डिवाइस 12 हजार डाटा सुरक्षित रख सकती है। बैटरी लगातार दो वर्ष तक चल सकती है।             

हर कंपनी के लिए लागू हो सकते हैं नियम

सूत्रों की मानें तो पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर सरकार जेनेरिक दवाओं पर फिलहाल इस डिवाइस का प्रयोग कर रही है। कुछ माह बाद इसके परिणाम देखने के बाद फॉर्मास्यूटिकल कंपनियों को इसका इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया जाएगा। इसके लिए बकायदा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने योजना भी तैयार की है।
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