सेंट्रल जेल में रिहाई के लिए भूख हड़ताल कर रहे 100 कैदियों में से 30 की हालत गुरुवार को और बिगड़ गई। जेल के डाक्टर ने इनका चेकअप किया। उधर इनके समर्थन में 250 और कैदियों ने रिहाई की मांग उठाई है। इसके चलते जेल प्रशासन के अफसर टेंशन में हैं।
कैदियों को मनाने की तमाम कोशिशें फेल हो चुकी हैं। जेल में कुल 2000 कैदी हैं। इनमें उम्र कैद की सजा पाए 350 ऐसे कैदी हैं, जो 14 साल या इससे अधिक की सजा काट चुके हैं। सभी रिहाई की मांग कर रहे हैं। इनमें से पहले 20 ने खाना छोड़ा। इसके बाद संख्या बढ़कर 100 हो गई। अन्य कैदी भूख हड़ताल पर नहीं हैं लेकिन धरने पर बैठ हैं। बुधवार को कई कैदियों की हालत बिगड़ गई थी। गुरुवार को भी इन्होंने खाना नहीं खाया। इससे तबीयत और खराब हो गई। अधिकारियों ने इनसे बात की लेकिन नहीं माने। यह कैदी आगरा, अलीगढ़, सहारनपुर, मेरठ और मुरादाबाद मंडल के हैं।
104 बंदियों की रिहाई की उम्मीद जगी
आगरा। रिहाई के लिए हड़ताल कर रहे कैदियों में से 104 की लिस्ट तैयार हो गई है। यह रिहाई के लिए फार्म ए भरकर गुजारिश पहले ही कर चुके हैं लेकिन इस पर गौर नहीं किया गया था। अब नए सिरे से लिस्ट बनी है। इसे आईजी जेल को भेजा जाएगा। वहां से शासन को संस्तुति की जाएगी। इसके बाद शासन को राज्यपाल के पास भेजना है। रिहाई का फैसला राज्यपाल करते हैं। इसके अलावा एक और रास्ता है दया याचिका का। इसमें ऐसे कैदियों की रिहाई कराई जाती है जिनकी उम्र ज्यादा हो। जेल प्रशासन ने दया याचिका तैयार कराने के लिए जेल में काउंटर लगवाए लेकिन कैदियों ने मना कर दिया। उनका कहना है कि उनकी रिहाई फार्म ए के तहत की जाए।