संस्थागत सुविधाओं में प्रसव कराने वाली महिलाओं की संख्या में गिरावट आई है। सरकारी थिंक-टैंक नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार, संस्थागत सुविधाओं में प्रसव कराने वाली महिलाओं की संख्या में अक्टूबर-दिसंबर 2020 के दौरान कोविड-19 महामारी से पहले की तुलना में गिरावट आई है। अक्टूबर-दिसंबर 2020 के दौरान लगभग 53,48,000 महिलाओं ने संस्थागत सुविधाओं में प्रसव कराया, जबकि महामारी से पहले अक्टूबर-दिसंबर 2019 में 54,98,000 महिलाओं ने प्रसव कराया था।
रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2020 के अंत तक केंद्र के प्रमुख पोषण अभियान के तहत फंड का उपयोग केरल में सबसे अधिक 58 प्रतिशत और ओडिशा में सबसे कम 8 प्रतिशत किया गया। छोटे राज्यों में फंड का उपयोग नागालैंड में सबसे अधिक 87 प्रतिशत और अरुणाचल प्रदेश में सबसे कम 9 प्रतिशत किया गया। जबकि केंद्र शासित प्रदेशों में फंड का उपयोग लक्षद्वीप में सबसे अधिक 65 प्रतिशत और पुडुचेरी में सबसे कम 22 प्रतिशत किया गया।
15 राज्यों में भरे गए एएनएम के 75 प्रतिशत पद
मानव संसाधन से संबंधित मुद्दों का जिक्र करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि 15 राज्यों ने सहायक नर्स मिडवाइफ (एएनएम) के 75 प्रतिशत से अधिक पदों को भरा गया है, जबकि पंजाब के आंकड़े उपलब्ध नहीं थे। ओडिशा ने अपने एएनएम के 100 प्रतिशत पदों को भरा है।जबकि बिहार ने 52 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश ने 61 प्रतिशत और हिमाचल प्रदेश ने 71 प्रतिशत पदों को भरा था। पंजाब के लिए एएनएम पदों के भरे जाने की जानकारी उपलब्ध नहीं थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा और बिहार जैसे राज्यों ने सबसे कम एएनएम पदों को भरा है। रिपोर्ट ने एनीमिया हस्तक्षेपों में सेवा वितरण को मजबूत करने का भी सुझाव दिया गया है। इसके अतिरिक्त, बिहार, झारखंड, केरल, पंजाब, राजस्थान, तेलंगाना, उत्तराखंड, उत्तर-पूर्वी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों जैसे राज्यों को बाल टीकाकरण, प्रसव से पहले चेक-अप और ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन के उपयोग पर ध्यान देने को कहा गया है।