पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग और आसपास के इलाकों में लगातार हो रही बारिश से भूस्खलन की घटनाओं ने तबाही मचा दी है। इस आपदा में 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग लापता हैं, कई सड़कें बंद हैं और कई घर बह गए हैं। इस आपदा के बीच राजनीति भी तेज हो गई है।
भाजपा का आरोप- ममता ने संकट के वक्त चुना जश्न
राज्य भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब उत्तर बंगाल के लोग भूस्खलन और बाढ़ की मार झेल रहे हैं, तब मुख्यमंत्री दुर्गा पूजा कार्निवल में व्यस्त हैं। उन्होंने कहा, 'यह उत्सव का समय नहीं है, मुख्यमंत्री को आज कार्निवल छोड़कर उत्तर बंगाल के लोगों के बीच होना चाहिए था। लेकिन अगर कोई इस सरकार से संवेदनशीलता की उम्मीद करता है, तो वह मूर्ख है।'
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अम्फान की यादें ताजा
समित भट्टाचार्य ने याद दिलाया कि साल 2020 में आए अम्फान चक्रवात ने बंगाल में 1 करोड़ से ज्यादा लोगों को प्रभावित किया था, लेकिन तब भी राज्य सरकार ने कोई ठोस सुधार नहीं किए। आज भी वही नाकामी दिख रही है। समिक भट्टाचार्य ने ममता सरकार को 'निकम्मी' करार देते हुए कहा कि यह सरकार अम्फान चक्रवात से भी कोई सबक नहीं ले पाई। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कोई प्रभावी आपदा प्रबंधन टीम नहीं है।
केंद्र की निगरानी में राहत कार्य
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि उत्तर बंगाल में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) तैनात है और गृह मंत्री व प्रधानमंत्री लगातार हालात की जानकारी ले रहे हैं। उन्होंने कहा, 'एनडीआरएफ राहत कार्य में लगी है, केंद्र सरकार हर पल स्थिति पर नजर रखे हुए है, लेकिन राज्य सरकार की संवेदनशीलता गायब है।'
दिलीप घोष का आरोप- सरकार की लापरवाही से बढ़ी तबाही
वहीं भाजपा नेता दिलीप घोष ने भी राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, 'वर्षों से नालों और नदियों की सफाई नहीं हुई। टीएमसी नेताओं ने जमीनों पर कब्जा कर उन्हें बेच दिया। अब पूरा उत्तर बंगाल डूबा हुआ है। यहां लोग बह रहे हैं और उधर कार्निवल हो रहा है। मुख्यमंत्री तो सिर्फ फोटो खिंचवाने जाती हैं।' उन्होंने कहा कि जब भी नुकसान होता है, राज्य सरकार केंद्र से पैसे की मांग करती है और फिर आंदोलन शुरू कर देती है कि केंद्र ने मदद नहीं दी। उन्होंने दावा किया कि भाजपा कार्यकर्ता राहत कार्य में लगे हैं, लेकिन राज्य सरकार कहीं नजर नहीं आ रही।
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दार्जिलिंग में बारिश-भूस्खलन से हालात गंभीर
शनिवार 4 अक्तूबर की रात से लगातार हो रही बारिश से दार्जिलिंग के मिरिक और सुखिया पोखरी इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। सड़कों और घरों के बह जाने से संपर्क मार्ग टूट गए हैं। कई ग्रामीण इलाकों में राहत पहुंचाना मुश्किल हो गया है। एनडीआरएफ की टीमों ने अब तक 160 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला है, इनमें से 105 लोगों को नाव से और 55 को जिप लाइन की मदद से बचाया गया। राहत दल ने एक शव भी बरामद किया है। भारी बारिश से लोगों के घर, सड़कें और दुकानें सबकुछ मिट्टी में समा गए हैं। जिन इलाकों में राहत पहुंच रही है, वहां भी हालात सामान्य होने में वक्त लगेगा। लोगों का कहना है कि सरकार की तैयारी न के बराबर थी।