वहीं, भारतीय वायुसेना भी इस एयर एक्सरसाइज में अपने राफेल, सुखोई, मिराज, जगुआर, तेजस, मिग-29, एलसीएच प्रचंड और एएलएच एमके4 रुद्र लड़ाकू हेलीकॉप्टर, एएलएच ध्रुव, सी-130, आईएल-78 और अवाक्स के साथ अपनी हवाई ताकत दिखाएगी।
खास बात यह होगी कि इस हवाई अभ्यास में भारत का स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस हिस्सा लेगा। लेकिन तेजस का एडवांस वर्जन मार्क-1A इस अभ्यास का हिस्सा नहीं बनेगा। तेजस के एडवांस वर्जन के हिस्सा न लेने से एयर फोर्स में भी भारी नाराजगी है। नाराजगी की एक दूसरी वजह ये भी है कि वायुसेना को Tejas-MK1A की पहली डिलीवरी फिलहाल लटक गई है।
नवंबर 2024 तक Tejas-MK1A मिलने की उम्मीद
वायुसेना के वरिष्ठ सूत्र ने अमर उजाला को बताया कि भारतीय वायुसेना को अपने पहले Tejas-MK1A के लिए अभी और इंतजार करना होगा। पहले इसे 31 मार्च 2024 तक डिलीवर किया जाना था। लेकिन अब भारतीय वायुसेना को इसके लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। नाम न बताने की शर्त पर अधिकारी ने बताया कि पहला एलसीए एमके-1ए नवंबर 2024 के आखिर तक वायुसेना को मिलने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि देश में पहली बार इतना बड़ा मल्टीनेशनल एयर एक्सरसाइज 'तरंग शक्ति' होने जा रहा है, और आपके पास अपने स्वदेशी एयरक्राफ्ट का एडवांस वर्जन न हो तो, थोड़ा खलता है। इस एक्सरसाइज में दुनियाभर के देश हिस्सा ले रहे हैं और आपको अपनी हवाई ताकत दिखाने का मौका मिलता है। वहां कई संभावित खरीदार भी होंगे, लेकिन एमके-1ए की क्षमताएं न देख पाने से वे भी 'मायूस' होंगे।
तेजस की डिलीवरी डेडलाइन से खुश नहीं है एयरफोर्स
सूत्रों ने बताया कि एमके-1ए की 31 मार्च की पहली डेडलाइन चूक जाने के बाद, विमान निर्माता कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने जुलाई में पहला विमान देने का भरोसा दिया था। जिसे बाद में आगे बढ़ा कर अगस्त, 2024 कर दिया गया। उन्होंने कहा कि हम तेजस एलसीए एमके-1ए प्रोग्राम की डिलीवरी डेडलाइन से खुश नहीं हैं। नए लड़ाकू विमानों को शामिल करने में हो रही देरी से वायुसेना की फाइटिंग कैपेबिलिटी पर असर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि हमने एचएएल के सामने इस मुद्दे को उठाया है और 83 एलसीए एमके-1ए विमानों के लिए 48,000 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट को वक्त पर पूरा करने की मांग की है। बता दें, कि एलसीए एमके-1ए ने 28 मार्च को बेंगलुरु में एचएएल की फैसिलिची से अपनी पहली उड़ान भरी थी।
इंजन की डिलीवरी करीब 10 माह लेट
सूत्रों के मुताबिक एचएएल ने तब हमें भरोसा दिया था कि वह तय समयसीमा 2024-25 में 16 तेजस एमके-1ए हल्के लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना को डिलीवर कर देगा। साथ ही, यह भी भरोसा दिलाया था कि वह 2028-29 तक सभी 83 तेजस एमके-1ए विमानों की ऑर्डर पूरा कर देगा। सूत्रों ने कहा कि अगर 2024-25 में हमें 16 की बजाय 8 लड़ाकू विमान भी मिल जाएं, तो हमें कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन देरी एचएएल की तरफ से नहीं है। असल में देरी की वजह अमेरिकी फर्म जीई एयरोस्पेस है, जो एचएएल को F404-IN20 इंजनों की सप्लाई में देरी कर रही है। इंजन की डिलीवरी करीब 10 माह लेट है।
प्रतिबंध की वजह से जीई एयरोस्पेस को नहीं मिल पा रहा माल
वायुसेना में कई लोग एलसीए एमके-1ए की समयसीमा पूरी होने को लेकर अभी भी संदेह कर रहे हैं, और इसका एक मुख्य कारण अमेरिकी फर्म जीई एयरोस्पेस द्वारा एचएएल को GE F404-IN20 इंजन की सप्लाई में देरी है। इंजन की डिलीवरी में करीब 10 महीने की देरी हो रही है। जीई एयरोस्पेस का कहना है कि उन्हें इंजन के कंपोनेंट सप्लाई में दिक्कत हो रही है। सूत्र बताते हैं कि कंपोनेंट की सप्लाई में दिक्कत रूस और चीन पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंध हैं। जीई एयरोस्पेस के कच्चे माल, फोर्जिंग, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स की भारी कमी है। साथ ही, वह टाइटेनियम और निकल अलाय मेटल्स की कमी से भी जूझ रही है, जो इंजन के लिए बेहद जरूरी हैं। सूत्रों ने बताया कि रूस और चीन टाइटेनियम के सबसे बड़े उत्पादकों में से हैं। वहीं चीन निकेल का सबसे बड़ा उत्पादक है। इन मेटल्स के न होने से जीई एयरोस्पेस की इंजन प्रोडक्शन कैपेसिटी पर खासा असर पड़ा है। सूत्रों ने बताया कि एचएएल को एफ404 इंजनों की सप्लाई सितंबर से शुरू होने की संभावना है, जिससे एलसीए एमके-1ए के प्रोडक्शन में तेजी आ सकती है। एचएएल को 31 मार्च 2024 तक 2 तेजस एमके1ए और 31 मार्च 2025 तक 18 लड़ाकू विमान सप्लाई करने थे। वहीं 10 तेजस ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट के पहले दिए गए ऑर्डर में भी देरी हुई है और अब तक केवल पांच की ही डिलीवरी हो पाई है, जिनमें से एक को आगे के ट्रायल के लिए वापस ले लिया गया है।
पुराने F404-IN20 इंजन भी लगाने को तैयार एचएएल
वायुसेना की टेंशन यह है कि अगले साल तक बाकी बचे दो मिग-21 बाइसन स्क्वाड्रनों को चरणबद्ध तरीके से हटा दिया जाएगा, ताकि नए तेजस विमानों के लिए जगह बनाई जा सके। वायुसेना ने हाल ही में अपने अंतिम मिग-21 लड़ाकू विमानों को राजस्थान के सूरतगढ़ स्थित उनके होम बेस से बीकानेर के नजदीक नाल डेजर्ट फाइटर बेस पर स्थानांतरित किया है, जहां शेष बचे एकमात्र भारतीय मिग-21 विमान तैनात हैं। सूत्रों ने बताया कि भारतीय वायुसेना को अभी तक अपने आखिरी मिग-21 को हटाना शुरू कर देना चाहिए था और एलसीए एमके-1ए का पहला स्क्वाड्रन तैयार कर लेना चाहिए था। क्योंकि पायलटों को नए जहाज की ट्रेनिंग, और कर्मचारियों को उसके मेंटेनेंस की ट्रेनिंग देने में लक्त लगेगा। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना के पास मिग-21 के रिप्लेसमेंट के लिए कोई प्लान बी नहीं है।
सूत्रों ने बताया कि डिलीवरी में देरी को लेकर रक्षा मंत्रालय ने एक समीक्षा बैठक की थी और एचएएल को मार्च 2025 तक 18 तेजस विमानों की डिलीवरी की समय पर पूरा करने के लिए कहा था। जिसके बाद एचएएल ने मार्च 2025 तक 18 जेट विमानों की डिलीवरी का भरोसा दिलाया है। एचएएल का कहना है कि अगर जरूरत पड़ी, तो वह नए जहाजों में पुराने F404-IN20 इंजन भी लगाने को तैयार है। बता दें, कि एचएएल ने भारतीय वायुसेना की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए एलसीए एमके-1ए के लिए नासिक में एक नई प्रो़डक्शन लाइन तैयार की है। एचएएल का कहना है कि वह बेंगलुरु में हर साल 16 एलसीए एमके-1ए तैयार कर सकता है और नासिक लाइन तैयार होने से यह संख्या बढ़ कर 24 जेट विमानों की जाएगी।
एलसीए एमके2 को भी हो सकती है दिक्कत
जहां तेजस एमके-1ए को इंजन की सप्लाई को मामला अभी तक लटका हुआ है, वहीं भारत सरकार एडवांस वर्जन एलसीए एमके2 लाने की बात कह रही है। 18 जुलाई 2024 को एचएएल ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और बीएसई स्टॉक एक्सचेंज को जो सूचना दी है, उसके मुताबिक एचएएल ने LCA AF MK-2 के फेज-3 प्रोग्राम के लिए एरोनॉटिकल डेवलेपमेंट एजेंसी (ADA) के साथ फुल स्केल इंजीनियरिंग डेपलपमेंट (FSED) के लिए करार किया है, जिसकी लागत 2970 करोड़ रुपये है। LCA AF MK-2 में GE F414 इंजन लगाए जाने हैं। लेकिन इस प्रोग्राम को भी जीई की तरफ से इंजन सप्लाई को लेकर झटका लग सकता है। सूत्रों का कहना है कि पहला एलसीए एमके2 2027 तक प्रोडक्शन के लिए शायद ही रेडी हो पाए। क्योंकि अगर प्रतिबंध लंबे खिंचे तो समस्याएं और भी बढ़ सकती हैं। एमके2 पुराने वर्जन के मुकाबले ज्यादा समय तक हवा में रहने में सक्षम होगा और इसकी हथियार ले जाने की क्षमता भी काफी अधिक होगी। भारत की निर्भरता जीई एयरोस्पेस पर बहुत ज़्यादा है। एलसीए एमके-1, एलसीए एमके-1ए, एलसीए एमके-2 और एएमसीए के इंजनों की सप्लाई के लिए जीई एयरोस्पेस को ही चुना गया है।