बीते साल शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में शून्य काल के दौरान भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने यह मामला उठाया था। उन्होंने कहा था कि विभिन्न अदालतें भी समान नागरिक संहिता लागू होने में हो रही देरी पर सवाल उठा रहे हैं।
भाजपा जल्द ही अपने तीसरा बुनियादी मुद्दा समान नागरिक संहिता की राह पर आगे बढ़ सकती है। कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मुद्दे का हल निकालने की जिम्मेदारी 22वीं विधि आयोग को सौंपने का संकेत दिया है। गौरतलब है कि भाजपा अब तक तीन में से दो बुनियादी मुद्दों राम मंदिर निर्माण और जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने को हल कर चुकी है।
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दरअसल बीते साल शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में शून्य काल के दौरान भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने यह मामला उठाया था। उन्होंने कहा था कि विभिन्न अदालतें भी समान नागरिक संहिता लागू होने में हो रही देरी पर सवाल उठा रहे हैं। देश का संविधान भी सभी नागरिकों के लिए समान कानून बनाने की बात करता है।
इसके जवाब में कानून मंत्री ने बीते 31 जनवरी को दुबे को लिखे पत्र में कहा है कि संविधान का अनुच्छेद 44 केंद्र सरकार को देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान संहिता लागू करने के लिए कहता है। इस अनुच्छेद के सभी प्रावधानों का विस्तृत अध्ययन की जिम्मेदारी 21वें विधि आयोग को दी गई थी। इस आयोग का कार्यकाल 31 अगस्त 2018 को खत्म हो गया। ऐसे में अब इस मामले को 22वें विधि आयोग को सौंपा जा सकता है।