जलवायु परिवर्तन के कारण पिछले डेढ़ दशक से भारत में तेजी से गर्मी बढ़ी है। सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायर्नमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक 117 सालों में देश का औसत तापमान 1.26 डिग्री
सेल्सियस बढ़ गया है। तापमान के ट्रेंड पर नजर रखने वाला संस्थान 1901 से 2017 तक की वार्षिक और मौसमी गर्मी का विश्लेषण करने के बाद इस नतीजे पर पहुंचा है कि देश लगातार और तेजी से गर्म हो रहा है।
आंकड़ों को देखते हुए सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते से हटने पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि
अमेरिका के पेरिस समझौते से हटने के बाद कार्बन उत्सर्जन और तापमान को नियंत्रित करना दुनिया के लिए बेहद मुश्किल होगा। तापमान में वृद्धि होने के साथ हम एक बड़ी आपदा की ओर बढ़ रहे हैं। फेसबुक लाइव पर यह रिपोर्ट जारी करते हुए सुनीता नारायण ने विश्व बिरादरी से एकसाथ मिलकर इसके लिए कड़े कदम उठाने की अपील की।
13 साल सबसे गर्म रहे
रिपोर्ट में कहा गया है कि 20वीं सदी की शुरुआत से ही भारत का औसत तापमान बढ़ना शुरू हुआ और यह 1.26 डिग्री सेल्सियस हो गया है। जबकि देश का औसत तापमान 1995 से तेजी से बढ़ा है। यदि इसी रफ्तार से तापमान बढ़ता रहा तो अगले दो दशकों में यह 1.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाएगा।
तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की दर से वृद्धि की संभावना पेरिस समझौते में व्यक्त की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक 2002 से 16 के बीच 15 में से 13 साल सबसे ज्यादा गर्म रहे हैं।
अर्थव्यवस्था, समाज और पर्यावरण पर खतरा
भारत लगातार और तेजी से गर्म हो रहा है। यह देश की अर्थव्यवस्था, समाज और पर्यावरणीय सेहत के लिए ठीक नहीं है। सीएसई के उपमहानिदेशक चंद्र भूषण ने कहा कि इसका नतीजा हम महसूस कर रहे हैं कि मौसम में कितना अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव आ रहा है। इससे मौसम का पूर्वानुमान लगाना भी कठिन हो रहा है। जलवायु परिवर्तन से गरीबों को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है।