मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जिस तरीके की घटनाएं केरल में हुई हैं, उसी तरीके का खतरा अभी भी उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों में बना हुआ है। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के रिटायर्ड वैज्ञानिक डॉ आरएस कनौजिया कहते हैं कि पिछले साल हुए पहाड़ों पर हुई बरसात के बाद कई पहाड़ों की कमजोरी की बात सामने आई थी।
केरल के वायनाड में लगातार हो रही बारिश के बाद हुए भूस्खलन से अब तक 54 लोगों की मौत हो चुकी है। जानकारी के मुताबिक अभी भी मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका है। लगातार हो रही बारिश से सिर्फ केरल के वायानाड ही नहीं बल्कि उत्तर भारत के कई इलाकों में भी खतरे का अलार्म बज चुका है। मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में 3 अगस्त तक अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश होने का अनुमान है। इस दौरान पहाड़ी हिस्सों में कमजोर हो चुके उनके कुछ हिस्सों के खिसकने की आशंका बनी हुई है। पिछले साल हिमाचल प्रदेश में मची तबाही के दौरान इस बात की पुष्टि हुई थी कि हिमाचल के कुछ पहाड़ अंदरूनी तौर पर कमजोर हो चुके हैं। जबकि अन्य पहाड़ी राज्यों में भी इस तरीके की आशंका जताई गई थी। मौसम विभाग के वैज्ञानिकों के मुताबिक लगातार तेज होने वाली बरसात में ऐसे सभी हिस्सों में खतरा बरकरार है।
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केरल में हो रही लगातार बरसात के चलते वायानाड के इलाके में भूस्खलन हुआ है। इस भूस्खलन में कई लोगों की जान चली गई, जबकि न जानें कितने लोगों के घर तबाह हो गए। मौसम विशेषज्ञ डॉक्टर पवन यादव कहते हैं कि यह पहला मौका नहीं है जब केरल में बारिश में इस तरीके से तबाही मचाई है। उनका कहना है कि इससे पहले भी केरल के एलेप्पी में हुई तेज बरसात के बाद हालात बदहाल हो गए थे। डॉक्टर पवन कहते हैं कि कि जो हालात केरल में बने हैं, ठीक इसी तरीके के हालात उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में भी हैं। उनका कहना है कि बीते कुछ समय से जिस तरीके से बारिश ने अपना पूरा ट्रेंड बदला है उसका ही यह असर है कि दक्षिण के राज्यों में इस तरीके से भूस्खलन की सूचनाओं सामने आ रही है। वह बताते हैं कि बदलते मौसम के चलते ही इन इलाकों में इतनी ज्यादा बारिश अचानक हो रही है कि कई बार मिट्टी के बारिश की तीव्रता को सहन नहीं कर पाते हैं और भूस्खलन जैसी घटनाएं हो रही है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जिस तरीके की घटनाएं केरल में हुई हैं, उसी तरीके का खतरा अभी भी उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों में बना हुआ है। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के रिटायर्ड वैज्ञानिक डॉ आरएस कनौजिया कहते हैं कि पिछले साल हुए पहाड़ों पर हुई बरसात के बाद कई पहाड़ों की कमजोरी की बात सामने आई थी। उनका कहना है जिस तरीके से हिमाचल प्रदेश में और उत्तराखंड से लेकर जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में बारिश का पैटर्न बदलता जा रहा है, वह किसी खतरे से कम नहीं है। डॉ कनौजिया कहते हैं कि जिस तरीके से पहाड़ी इलाकों में बादलों के फटने की सूचनाए आ रही हैं वह पहाड़ों के छोटे-छोटे हिस्से को बहुत कमजोर कर जाती हैं। उनके मुताबिक पिछले साल जिस तरीके से हिमाचल प्रदेश में बारिश हुई थी और पहाड़ों का खिसकना जारी था वह इस बात के संकेत थे कि यहां के पहाड़ भी कमजोर हो रहे हैं। पहाड़ों पर होने वाली बारिश और उसके पड़ने वाले इस असर को लेकर लगातार संबंधित महकमा केंद्र सरकार को भी अपडेट कर रहा है।
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वहीं मौसम विभाग के मुताबिक अगले 24 घंटे के भीतर केरल के अंदर अभी लगातार और बारिश हो सकती है। विभाग के वैज्ञानिकों का अनुमान है कि जिस तरीके की परिस्थितियां बनी हैं, उसमें सिर्फ केरल ही नहीं बल्कि दक्षिण के कुछ और इलाकों में तेज बारिश होने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिक डॉक्टर पंकज यादव कहते हैं कि सिर्फ बारिश के चलते होने वाले भूस्खलन का ही खतरा नहीं बना है, बल्कि लगातार नदियों में बड़े हुए जलस्तर से भी हालत खराब हो सकते हैं। वह कहते हैं कि बीते कुछ दिनों में जिस तरीके से उत्तर से लेकर दक्षिण और पूर्व से लेकर पश्चिम तक की नदियों में जल स्तर बढ़ता जा रहा है, वह भी एक चिंता का विषय बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक 3 अगस्त उत्तर भारत के अलग-अलग हिस्सों में तेज बारिश का अनुमान लगाया जा रहा है। इसमें पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड समेत दिल्ली एनसीआर के कुछ हिस्सों और चंडीगढ़ में बारिश का अनुमान लगाया गया है।