आपने जमानत खारिज की, तो कोई कोर्ट जमानत नहीं देगा : आरोपी के वकील की दलील
आशीष की ओर से वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने हाईकोर्ट के आदेश का बचाव किया। कहा, उनका मुवक्किल घटना के समय मौजूद नहीं था। अगर अदालत जमानत के लिए कोई शर्त जोड़ना चाहती है, तो जोड़ दे। लेकिन, शीर्ष कोर्ट ने जमानत खारिज कर दी तो उनके मुवक्किल को देश की कोई अदालत जमानत नहीं दे सकती।
अपराध गंभीर...पर आरोपी भागेगा नहीं
- यूपी सरकार के वकील महेश जेठमलानी ने कहा, जमानत को चुनौती देने वाली सिफारिश सरकारी अधिकारियों के साथ शुक्रवार को साझा की गई है।
- एसआईटी ने रिपोर्ट में कहा है, आशीष रसूखदार व्यक्ति है। गवाहों को प्रभावित कर सुबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है। हालांकि हम इससे सहमत नहीं हैं।
- जेठमलानी ने कहा, यह कहना कि अपराध जानबूझकर किया गया था या नहीं, ट्रायल का विषय है। हालांकि अपराध गंभीर है और सरकार ने जमानत का विरोध किया है। आरोपी के भागने की आशंका नहीं है।
कोर्ट रूम लाइव : हम इस बकवास को मंजूरी नहीं दे सकते
- याचिकाकर्ता के वकील दुष्यंत दवे : हाईकोर्ट ने आरोपपत्र पर विचार नहीं किया, बल्कि प्राथमिकी पर भरोसा किया, जिसमें कथित रूप से एक व्यक्ति को गोली लगने की बात कही गई है। जमानत यह तथ्य को ध्यान में रखते हुए दी कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतकों के शरीर में गोली के घाव के सुबूत नहीं मिले हैं।
- सीजेआई रमण : जज पोस्टमार्टम रिपोर्ट वगैरह के विवरण में कैसे जा सकते हैं। हम जमानत का मामला सुन रहे हैं। इसे लंबा नहीं खींच सकते। जमानत के मामले में जिस तरह से केस के मेरिट पर विचार किया गया, वह गैरजरूरी था। हम इस तरह की बकवास को मंजूरी नहीं दे सकते। ऐसे शब्द का इस्तेमाल करने के लिए माफ करें। ...ट्रायल शुरू नहीं हुआ है और सुबूत जुटाए जा रहे हैं।
- पीठ : जस्टिस राकेश कुमार जैन की निगरानी वाली एसआईटी ने मिश्र की जमानत के खिलाफ अपील दायर करने की सिफारिश की थी। यूपी सरकार का रुख क्या है?
- सरकार के वकील जेठमलानी : एसआईटी ने गवाहों को प्रभावित करने और सुबूत नष्ट करने की आशंका जताते हुए जमानत के खिलाफ अपील करने की सिफारिश की थी। मामले के सभी 98 गवाहों से संपर्क कर उनकी सुरक्षा की जानकारी हासिल की गई, पर किसी भी गवाह ने डराने-धमकाने की बात नहीं की। हमने जमानत का पहले भी विरोध किया था, हमारा रुख अब भी वही है।
- दवे : मामले में एक गवाह को मार्च में पीटते हुए धमकी दी गई कि अब भाजपा सत्ता में है, देख तेरा क्या हाल होगा।
गवाहों को सुरक्षा जारी रहे
लखीमपुर हिंसा में मारे लोगों के परिजनों की याचिका पर 16 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार और आशीष को नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने यूपी सरकार को निर्देश दिया था कि सभी गवाहों को सुरक्षा जारी रहनी चाहिए। पिछले साल 3 अक्तूबर को लखीमपुर में एसयूवी से कुचलकर 4 किसानों की मौत हुई थी।