इस बीच में चर्चा छिड़ गई है, एमपी की जीत में शिवराज की लाडली बहना गेमचेंजर साबित हुई है या मोदी की गारंटी? यदि लाडली बहना को गेमचेंजर मानेंगे तो मुख्यमंत्री के लिए शिवराज का दावा मजबूत हो जाता है। मोदी की गारंटी को मानेंगे तो शिवराज की विदाई तय है। मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए भाजपा के नेता इसी आधार पर अपना-अपना दावा मजबूत करते नजर आ रहे हैं।
चुनाव नतीजों के बाद से ही कुर्सी के लिए भाजपा दो धड़ों में बंटी हुई नजर आ रही है। एक धड़ा लाडली बहना को गेमचेंजर मान रहा है, दूसरा मोदी मैजिक को जीत का पूरा श्रेय दे रहा है। लाडली बहना को पूरा क्रेडिट देने वाले अब तक खुलकर सामने नहीं आए हैं, लेकिन जो लोग इसे क्रेडिट नहीं दे रहे वह मुखरता से बोल रहे हैं। इससे साफ है कि जो लोग लाडली बहना को जीत का क्रेडिट नहीं दे रहे हैं, वह शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री के तौर पर नहीं देखना चाहते हैं।
क्यों कैलाश, वीडी और पटेल दे रहे मोदी मैजिक को श्रेय?
सूत्रों की मानें तो दूसरे धड़े ने हाईकमान तक फीडबैक पहुंचाया है कि जनता ने मोदी को वोट दिया है शिवराज सरकार को नहीं। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने तो नतीजों वाले दिन यानी 3 दिसंबर को ही इस प्रचंड जीत को मोदी के नाम समर्पित कर दिया है। विजयवर्गीय ने जीत में लाडली बहना योजना के योगदान वाले सवाल पर मीडिया को ही नसीहत दे दी कि ये दरबारी सवाल न पूछें। उन्होंने यह तक तर्क दिया कि राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कौन सी लाडली बहना योजना थी? विजयवर्गीय खुद को सीएम का दावेदार भी मानते हैं। परिणाम के बाद से ही उन्होंने दिल्ली में डेरा डाल रखा है। इस दौरान उनकी और अमित शाह के बीच दो दौर की बातचीत हो चुकी है।
यही नहीं दिल्ली पहुंचे मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा ने भी जीत का श्रेय मोदी मैजिक को दिया। उन्होंने इसे संगठन की रीति-नीति और प्लानिंग की विजय मुकर्रर किया। शर्मा ने 40 से 50 प्रतिशत वोट बटोरने को उपलब्धि मानते हुए उसे प्रचारित कर अपने नंबर बढ़ाए है। पीएम मोदी द्वारा पीठ थपथपाने और रोड शो में बगल में खड़ा करने के बाद शर्मा भी उम्मीद से है कि वे सीएम हो जाएं।
विजयवर्गीय-शर्मा के साथ दिल्ली पहुंचने वालों में केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल भी रहे। चर्चा है कि पटेल सीएम बनने जा रहे है। परिणाम वाले दिन तो उन्होंने मोदी और संगठन की जीत बताया, लेकिन दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद बकायदा प्रेस कांफ्रेंस कर एमपी की जीत का श्रेय मोदी और केंद्रीय नेतृत्व को दिया गया।
सूत्र बताते है कि दिल्ली में कैलाश विजयवर्गीय और पटेल की मुलाकात भी हुई है। बताया जा रहा है कि विधायक गोपाल भार्गव भी दिल्ली बुलाया गया था। भार्गव तो चुनाव के दौरान ही खुद को सीएम बता चुके है। ऐसे में अब सबकी निगाहें केंद्रीय नेतृत्व पर है वह क्या सलूक करता है।
सिंधिया और तोमर ने की लाडली बहना की तारीफ
3 दिसंबर को भाजपा को बहुमत मिलने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया शिवराज से मिलने पहुंचे थे। उस वक्त उन्होंने कहा कि भाजपा की जीत के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा का नेतृत्व है। जब उनसे पूछा कि लाडली बहना योजना का कितना बड़ा रोल रहा तो उन्होंने कहा कि लाडली बहना का असर पूरी तरह से रहा है और ये गेमचेंजर है। इसका पूरा क्रेडिट शिवराज सिंह चौहान को जाता है। केंद्रीय मंत्री सिंधिया विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल की तरह लाडली के सवाल को खारिज नहीं करते। हाईकमान यदि सीएम के नाम पर चर्चा करता है तो सिंधिया मुख्यमंत्री के तौर पर शिवराज के नाम को खारिज करेंगे, इसकी संभावना बहुत कम है, जबकि मुरैना की दिमनी सीट से जीत के बाद नरेंद्र सिंह तोमर से पूछा गया कि जीत का क्रेडिट किसे देंगे, तो उन्होंने मोदी और लाडली बहना दोनों को दिया। तोमर मोदी और शिवराज दोनों को जीत का क्रेडिट दे रहे हैं। वे शिवराज के पुराने साथी हैं। मध्यप्रदेश में चुनाव अभियान समिति के संयोजक भी रहे हैं।