एक देश एक चुनाव को लेकर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नेतृत्व में बनाए गए उच्च स्तरीय पैनल ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंप दी है। इस बीच, पूरे देश में एक साथ लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव कराने को लेकर सिफारिशी रिपोर्ट तैयार करने से जुड़ी एक बड़ी और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। पैनल ने बताया है कि इन सिफारिशों से पहले उन्होंने सात देशों की चुनाव प्रक्रिया का अध्ययन किया था। इन देशों में दक्षिण अफ्रीका, स्वीडन, बेल्जियम, जर्मनी, जापान, इंडोनेशिया और फिलीपींस शामिल हैं। पूर्व राष्ट्रपति कोविंद की अध्यक्षता वाले पैनल ने बताया कि इसका उद्देश्य चुनावों में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सर्वोत्तम अंतर्राष्ट्रीय विधियों और प्रथाओं का अध्ययन करना और उन्हें अपनाना था।
दक्षिण अफ्रीका में ऐसे होता है चुनाव
पैनल ने बताया कि दक्षिण अफ्रीका में नेशनल असेंबली और प्रांतीय विधानमंडल दोनों के लिए एक साथ मतदान होता है। हालांकि, नगरपालिका चुनाव पांच साल के चक्र में प्रांतीय चुनाव से अलग होते हैं। इस साल 29 मई को दक्षिण अफ्रीका में आम चुनाव होंगे। इस दौरान मतदाता नई राष्ट्रीय असेंबली और प्रांतीय विधानमंडल के लिए मतदान करेंगे।
स्वीडन में है आनुपातिक चुनाव प्रणाली
वहीं, स्वीडन में आनुपातिक चुनाव प्रणाली के आधार पर चुनाव किए जाते हैं। इस प्रणाली में राजनीतिक दलों को उनके वोटों के आधार पर निर्वाचित विधानसभा में कई सीटें सौंपी जाती हैं। पैनल ने बताया कि स्वीडन में वोटिंग के लिए अपनाई जाने वाली प्रणाली में संसद (रिक्सडैग), काउंटी परिषदों और नगर परिषदों के लिए चुनाव एक ही समय में होते हैं। ये चुनाव हर चार साल में सितंबर के दूसरे रविवार को होते हैं जबकि नगरपालिका और विधानसभाओं के चुनाव हर पांचवें साल सितंबर में दूसरे रविवार को होते हैं।
जर्मनी, जापान और इंडोनेशिया के बारे में भी बताया
एक देश-एक चुनाव के मुद्दे पर उच्चस्तरीय पैनल ने जर्मनी, जापान और इंडोनेशिया जैसे देशों में अपनाई जाने वाली चुनावी प्रक्रिया के बारे में भी बताया, जिसका उन्होंने तुलनात्मक अध्ययन किया। पैनल के सदस्य सुभाष सी कश्यप ने बताया कि जर्मन संसद के निचले सदन बुंडेस्टाग के चुनाव में मतदाता एक साथ दो वोट डालते हैं, इनमें से एक वोट स्थानीय उम्मीदवार के लिए होता है और दूसरा वोट पार्टी के लिए। यहां बुंडेस्टाग के लिए सीटों की संख्या भी घटती-बढ़ती रहती हैं। सुभाष कश्यप ने बुंडेस्टाग द्वारा चांसलर की नियुक्ति की प्रक्रिया का समर्थन किया। इसके साथ ही उन्होंने जापान की चुनावी प्रक्रिया का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारत में इन दोनों में से कोई एक प्रक्रिया अपनाई जा सकती हैं। जापान में प्रधानमंत्री को पहले नेशनल डायट(जापानी संसद) द्वारा चुना जाता है। इसके बाद उस पर अंतिम मुहर जापान के राजा द्वारा लगाई जाती है।
पैनल ने आगे बताया कि इंडोनेशिया भी 2019 से एक साथ चुनाव की प्रक्रिया अपना रहा है। वहां राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और दोनों राष्ट्रीय और क्षेत्रीय विधायी निकायों के सदस्य एक ही दिन चुने जाते हैं। वहां, राजनीतिक दलों को राष्ट्रीय संसद के लिए अर्हता प्राप्त करने के लिए 4 प्रतिशत वोटों की आवश्यकता होती है। वहीं, राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को कुल मिलाकर 50 प्रतिशत से अधिक और देश के आधे से अधिक प्रांतों में जीत के लिए वोट कम से कम 20 प्रतिशत वोटों की आवश्यकता होती है।
पूर्व राष्ट्रपति कोविंद ने सौंपी राष्ट्रपति मुर्मू को रिपोर्ट
इससे पहले, रामनाथ कोविंद की अगुवाई वाली समिति ने राष्ट्रपति भवन में द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। इस दौरान गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे। समिति ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपी। रिपोर्ट 18,626 पन्नों की है। एक साथ चुनाव कराने संबंधी उच्चस्तरीय समिति ने एक साथ चुनाव कराने के लिए दो चरणों वाले दृष्टिकोण की सिफारिश की है। समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले चरण के रूप में, लोकसभा और विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव कराए जा सकते हैं। इसके बाद 100 दिन के अंदर दूसरे चरण में स्थानीय निकायों के चुनाव कराए जा सकते हैं।
समिति ने एक साथ चुनाव कराने के लिए उपकरणों, कर्मचारियों और सुरक्षा बलों संबंधी जरूरतों के लिए पहले से योजना बनाने की सिफारिश की। इसके साथ ही निर्वाचन आयोग लोकसभा, विधानसभा, स्थानीय निकाय चुनावों के लिए राज्य चुनाव अधिकारियों के परामर्श से एकल मतदाता सूची, मतदाता पहचान पत्र तैयार करेगा।
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इस रिपोर्ट में कोविंद पैनल ने यह भी बताया है कि 1983 में चुनाव आयोग, 1999 में विधि आयोग और 2017 में नीति आयोग ने भी देश में एक चुनाव की सिफारिश की थी। पैनल ने कहा कि एक साथ चुनाव की अवधारणा को कई रिपोर्टों और अध्ययनों में दर्शाया गया है। 1983 में अपनी प्रारंभिक वार्षिक रिपोर्ट में भारत के चुनाव आयोग ने लोकसभा और विधानसभा के लिए एक साथ चुनाव कराने की अवधारणा की वकालत की थी। इतना ही नहीं, विधि आयोग ने भी चुनाव कराने के लिए प्रक्रियाओं के अध्ययन के बाद 1999, 2015 और 2018 (मसौदा) की अपनी रिपोर्टों में एक साथ चुनावों की प्रथा को अपनाने की सिफारिश की।
लोकसभा में अब तक 28 अविश्वास प्रस्ताव आए
कोविंद की अध्यक्षता वाली समिति के अनुसार, अब तक लोकसभा में कुल 28 अविश्वास प्रस्ताव आए हैं। इन चुनौतियों का समाधान पेश करते हुए समिति ने सुझाव दिया कि त्रिशंकु सदन या अविश्वास मत के परिदृश्य में, नई लोकसभा के गठन के लिए नए सिरे से चुनाव कराए जाने चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, लोकसभा में सबसे अधिक अविश्वास प्रस्ताव 1961-70 के दौरान कुल 12 बार आए। इसके बाद 1971-1980 के दौरान छह अविश्वास प्रस्ताव लाए गए थे। इसके विपरीत 2000 से 2023 तक केवल तीन अविश्वास प्रस्ताव दर्ज किए गए। इन मुद्दों से निपटने के लिए समिति ने एक व्यापक तंत्र तैयार किया है। इस प्रस्तावित तंत्र में लोकसभा के कार्यकाल को उसकी उद्घाटन बैठक से पांच वर्ष निर्धारित करने वाला एक सांविधानिक संशोधन शामिल है। यदि कार्यकाल पूरा होने से पहले विघटन होता है तो नए चुनाव होंगे और नई लोकसभा पिछले कार्यकाल के शेष भाग को पूरा करेगी। इसी तरह राज्य विधानसभाएं भी अपनी उद्घाटन बैठक से निश्चित पांच साल की अवधि पर संचालित होंगी। विघटन से नए सिरे से चुनाव कराए जाएंगे और लोकसभा का कार्यकाल समाप्त होने तक नई विधानसभा काम करेगी। इसके अलावा, प्रस्ताव में नगर पालिकाओं और पंचायतों में रिक्तियों को भरने के लिए मध्यावधि चुनाव कराने का सुझाव दिया गया, ताकि अगले आम चुनावों तक निर्बाध शासन सुनिश्चित किया जा सके।