भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक कैंटीन का उद्घाटन किया। इस कैंटीन का संचालन दिव्यांग कर्मचारी करेंगे। उद्घाटन के दौरान मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि उनकी दो बेटियां उनके लिए प्रेरणा स्रोत हैं, जो कि दिव्यांग भी हैं। उन्होंने कहा कि उनकी बेटियों ने उन्हें शाकाहार के लिए प्रेरित किया। मुख्य न्यायाधीश के अनुसार, उनकी बेटियों ने उन्हें क्रूरता मुक्त जीवन जीने के लिए प्रेरित किया है। मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने रेशन और चमड़े के उत्पाद खरीदने भी बंद कर दिए हैं। यह उनकी क्रूरता मुक्त जीवन शैली जीने को लेकर प्रतिबद्धता है।
मुख्य न्यायाधीश ने इस बात पर भी जोर दिया कि दिव्यांग व्यक्तियों के साथ बातचीत करने से उनकी जबरदस्त क्षमता का पता चलता है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट में मिट्टी कैफे जैसी पहल की स्थापना की व्यापक रूप से सराहना की गई है। आपको बता दें कि बीते वर्ष 10 नवंबर को मिट्टी कैफे खोला गया था। इस कैफे को दिव्यांग व्यक्ति चलाते हैं। 'मिट्टी कैफे' का उद्घाटन डीवाई चंद्रचूड़ ने ही किया था।
भारत के मुख्य न्यायाधीश ने उच्च न्यायालय में जिस कैंटीन का उद्घाटन किया है, उसका नाम सागर एक्सप्रेस है। यहां छह दिव्यांग व्यक्तियों को रोजगार दिया है, जो रोटेशनल शिफ्ट में काम करेंगे। इस पहल का उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।
डीवाई चंद्रचूड़ ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का इलेक्ट्रॉनिक डेली हियरिंग केस रजिस्टर (ई-डीएचसीआर) पोर्टल भी शुरू किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि ई-डीएचसीआर पोर्टल सार्वजनिक महत्व के निर्णयों के डिजिटल प्रकाशन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ई-डीएचसीआर पोर्टल के माध्यम से लोगों तक कानूनी ज्ञान पहुंचाना आसान होगा। इस तरह से इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले किसी भी व्यक्ति तक अदालत के फैसले पहुंचाने में आसानी होगी।