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जानिए कौन हैं ममता बनर्जी के चहेते आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार, जिन्हें सीबीआई करना चाहती है गिरफ्तार

Sat, 21 Sep 2019 10:28 PM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ममता बनर्जी, राजीव कुमार (फाइल फोटो)
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1989 बैच के आईपीएस अफसर राजीव कुमार पर शारदा चिटफंड मामले में सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप है। राजीव कुमार 2013 में शारदा चिटफंड घोटाले की जांच के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम के अध्यक्ष थे। उनपर बतौर जांच अधिकारी धांधली के आरोप हैं। इन आरोपों को लेकर ही सीबीआई राजीव कुमार को गिरफ्तार करना चाहती है। 

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एसआईटी के अध्यक्ष के तौर पर राजीव कुमार ने जम्मू-कश्मीर में शारदा प्रमुख सुदीप्त सेन और उनके सहयोगी देवयानी को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि कुमार ने उनके पास से मिली एक डायरी को गायब कर दिया था। इस डायरी में उन सभी नेताओं के नाम थे जिन्होंने चिटफंड कंपनी से रुपये लिए थे। 

ममता से पहले थे माकपा के करीबी

राजीव कुमार के करियर को कई सालों तक करीब से देख चुके सूत्रों का कहना है कि गुप्त ऑपरेशन और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस को सफलतापूर्वक अंजाम देने की उनकी क्षमता के साथ वो 2011 से पहले माकपा सरकार के नेतृत्व के करीबी हुआ करते थे। 

इसी को लेकर 2011 में मुख्यमंत्री बनने के बाद ममता बनर्जी राजीव कुमार के खिलाफ जांच कराना चाहती थीं लेकिन कई बड़े अधिकारियों ने ममता को ऐसा न करने के लिए समझाया और कहा कि वो मदद करेंगे। 

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2011 में ममता राजीव कुमार को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने से बच रही थीं। माकपा नेतृत्व के करीबी होने के चलते ममता उनपर भरोसा नहीं कर पा रही थीं। लेकिन, वरिष्ठ अधिकारी जो कुमार की प्रगति से अवगत थे उनके कहने पर ममता को उनपर भरोसा हुआ। 

ममता से करीबी के चलते बने कमिश्नर

राजीव कुमार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का करीबी माना जाता है। सीएम ममता के करीबी होने का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है जब सीबीआई की टीम राजीव कुमार से पूछताछ करने गई थी तो पुलिस ने सीबीआई टीम को अपने कब्जे में ले लिया था। चार फरवरी 2019 को सीएम ममता बनर्जी राजीव कुमार के लिए धरने पर बैठ गईं। 

इस घटना को लेकर कोलकाता पुलिस और केंद्रीय एजेंसी के बीच कई दिनों तक नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला। जनवरी 2012 में कुमार को नवगठित बिधाननगर पुलिस आयुक्तालय का आयुक्त नियुक्त किया गया।

2013 में शारदा चिटफंड घोटाला सामने आने के बाद कुमार को जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स का प्रमुख बनाया गया। कुमार और उनकी टीम ने अप्रैल 2013 में जम्मू-कश्मीर से अपने दो सहयोगियों के साथ शारदा समूह के अध्यक्ष सुदीप्तो सेन को गिरफ्तार किया।

मई 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने शारदा घोटाले के सभी मामलों को सीबीआई को दे दिया। अदालत ने एसआईटी को एक साल तक की जांच से जुड़े सभी कागजात, सबूत, और गिरफ्तार आरोपी को सीबीआई को देने को कहा। 

कोलकाता आयुक्त बनने पर कांग्रेस-भाजपा ने किया था विरोध

2016 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कुमार की क्षमताओं और मुख्यमंत्री के साथ निकटता के कारण उनको कोलकाता पुलिस आयुक्त बना दिया गया। हालांकि, भाजपा और कांग्रेस दोनों ने विपक्षी नेताओं के फोन टैप करने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ शिकायत की।

चुनाव आयोग ने राज्य सरकार से कुमार की जगह दूसरे अधिकारी को नियुक्त करने को कहा। कुमार की जगह सौमेन मित्रा को बुलाया गया जो उस समय सीआईडी में एडीजी थे। लेकिन मित्रा ने इस पद पर बमुश्किल एक महीने काम किया। कुमार को 21 मई 2016 को फिर से आयुक्त के रूप में वापस बुला लिया गया।

कई हाई प्रोफाइल मामलों में कमाया नाम

राजीव कुमार ने माओवादियों के खिलाफ अपनी क्षमता साबित की। लालगढ़ आंदोलन के नेता छत्रधर महतो और अन्य माओवादी नेताओं (सितंबर 2009 में) की गिरफ्तारी के पीछे भी राजीव कुमार का दिमाग था। 

जब राजीव कुमार कोलकाता पुलिस के स्पेशल टास्क फोर्स के प्रमुख थे तो कथित आतंकवादियों को पकड़ने और नकली मुद्रा रैकेट पर नकेल कसने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने दिल्ली और मुंबई पुलिस एसटीएफ को महत्वपूर्ण इनपुट प्रदान किए थे।

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राजीव कुमार ने अमेरिकी केंद्र पर हमला (2002), खादिम के मालिक का अपहरण (2001), जैसे कई हाई प्रोफाइल मामलों में भी अहम भूमिका निभाई। 

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