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आपके लिए: जानिए क्या होती है जनहित याचिका, कैसे करते हैं इसे दाखिल?

Sun, 05 May 2019 10:01 AM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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आप लगातार खबरों में पढ़ते होंगे कि हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में किसी व्यक्ति, नेता और पार्टी ने जनहित याचिका (पीआईएल) दाखिल की है। तो मन में सवाल आता होगा कि आखिर ये क्या है और इसे कैसे दाखिल किया जाता है। भारतीय नागरिकों के मूल अधिकारों का हनन हो रहा है तो हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अधिकारों की रक्षा की गुहार लगाई जा सकती है। हाईकोर्ट में अनुच्छेद-226 के तहत और सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद-32 के तहत याचिका दायर की जा सकती है।

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अगर किसी एक आदमी के अधिकारों का हनन हो रहा है तो उसे निजी यानि पर्सनल इंट्रेस्ट लिटिगेशन माना जाएगा और अगर ज्यादा लोग प्रभावित हो रहे हैं तो उसे जनहित याचिका माना जाएगा। पीआईएल डालने वाले शख्स को अदालत को यह बताना होगा कि कैसे उस मामले में आम लोगों का हित प्रभावित हो रहा है। दायर की गई याचिका जनहित है या नहीं, इसका फैसला कोर्ट ही करता है। इसमें सरकार को प्रतिवादी बनाया जाता है। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट सरकार को उचित निर्देश जारी करती हैं। 

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनावी हलफनामे में संपत्ति का ब्यौरा छिपाए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। इसी तरह की एक जनहित याचिका कांग्रेस की न्याय योजना को लेकर राहुल गांधी के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट में दाखिल की गई थी। हालांकि इस याचिका को कोर्ट ने इसी सप्ताह खारिज कर दिया। जनहित से जुड़े व्यापक महत्व के मुद्दों को हल करने में जनहित याचिका एक कारगर हथियार है। आरटीआई आने के बाद से यह हथियार और भी मजबूत हो गया है। 

इस तरह दाखिल कर सकते हैं याचिका

लेटर के द्वारा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की जा सकती है। अगर अदालत को लगता है कि ये जनहित से जुड़ा मामला है तो लेटर को ही पीआईएल के तौर पर लिया जाता है और सुनवाई होती है। लेटर में बताया जाना जरूरी है कि मामला कैसे जनहित से जुड़ा है। अगर कोई सबूत है तो उसकी कॉपी भी लेटर के साथ लगा सकते हैं। लेटर जनहित याचिका में तब्दील होने के बाद संबंधित पक्षों को नोटिस जारी होता है और याचिकाकर्ता को भी कोर्ट में पेश होने के लिए कहा जाता है। अगर याचिकाकर्ता के पास वकील न हो तो कोर्ट मुहैया कराती है। हाईकोर्ट चीफ जस्टिस के नाम भी लेटर लिखा जा सकता है।

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दूसरा तरीका ये है कि वकील के जरिए जनहित याचिका दायर की जा सकती है। वकील याचिका तैयार करने में मदद करता है। याचिका में प्रतिवादी कौन होगा और किस तरह उसे ड्रॉफ्ट किया जाएगा, इन बातों के लिए वकील की मदद जरूरी है। पीआईएल दायर करने के लिए कोई फीस नहीं लगती। इसे सीधे काउंटर पर जाकर जमा करना होता है। लेकिन, जिस वकील से इसके लिए सलाह ली जाती है, उसकी फीस देनी होती है। पीआईएल ऑनलाइन दायर नहीं की जा सकती।

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