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एक समय में डॉलर से ज्यादा शक्तिशाली था रुपया, जानें भारतीय मुद्रा के बारे में रोचक बातें

Wed, 20 Jun 2018 07:32 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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आप ये बात तो अच्छे से जानते होंगे कि एक नकली 500 रुपये के नोट की पहचान किस प्रकार की जाती है, आपको ये बात भी पता होगी कि रिजर्व बैंक के पास नोट छापने का अधिकार क्यों है। वहीं जिन पैसों का इस्तेमाल आप अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में करते हैं, क्या उनके बारे में आप सबकुछ जानते हैं? भारतीय रुपये के बारे में कुछ बातें ऐसी हैं जो आपको पक्का नहीं पता होंगी, आज हम आपको ऐसी ही कुछ बातें बताने जा रहे हैं-
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साल 1954 और 1978 के बीच 5,000 और 10,000 के नोट चलन में थे।
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आजादी के बाद भी पाकिस्तान भारतीय मुद्रा पर अपनी मुहर लगाकर प्रयोग करता रहा। उसने ऐसा तब तक किया जब तक उसके पास स्वयं की मुद्रा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हो गई। 

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एक रुपये के नोट वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किए जाते हैं जबकि उस पर सचिव के हस्ताक्षर होते हैं।
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भारत के 500 और 1000 के नोट नेपाल में बैन थे।
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साल 2007 में कोलकाता में 5 रुपये के सिक्के की कमी हो गई थी। ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि इन सिक्कों की तस्करी ब्लेड बनाने के लिए बांग्लादेश में की जा रही थी। 
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10 रुपये के सिक्के के खनन की लागत 6.10 रुपये आती है।

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एक नोट के आगे की तरफ अंग्रेजी और हिंदी दो भाषाएं होती हैं जबकि नोट की विपरीत दिशा में कुल 15 भाषाएं लिखी होती हैं। जैसे असमिया, बंगाली, गुजराती, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल, तेलुगू और उर्दू।

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यदि आपके पास कोई फटा हुआ नोट है या किसी फटे नोट का 51 फीसदी से ज्यादा हिस्सा है तो आप उसे बदलकर बैंक से एक नया नोट ले सकते हैं।

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सभी भारतीय नोटों पर भारतीय जगहों की छाप होती है, जैसे 20 रुपये के नोट पर अंडमान द्वीप की छाप है।

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फिफ्थ पिलर नाम के एनजीओ ने एक बार भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए 0 रुपये के नोट भी छापे थे।

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साल 1971 में रुपये डॉलर से अधिक शक्तिशाली था, उस वक्त 13 डॉलर की कीमत एक रुपये के बराबर थी।

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भारतीय मुद्रा पर छपी गांधी जी की तस्वीर को हाथों से नहीं बनाया गया है बल्कि यह तस्वीर साल 1947 में ली गई थी। वास्तविकता में ली गई तस्वीर में गांधी जी पास खड़े एक व्यक्ति की ओर देखते हुए हंस रहे हैं।

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आज के समय में कपास और कपास के टुकड़ों का प्रयोग कागज की मुद्रा बनाने के लिए किया जाता है। 

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एक बार भारतीय रिजर्व बैंक को सिक्कों के खनन का काम विदेशों में करवाना पड़ा था।
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यह जानना बहुत ही आसान है कि किस सिक्के के खनन का काम कहां किया गया है। इसके लिए सिक्कों पर एक तरह का चिन्ह बना होता है। जैसे अगर किसी सिक्के के खनन का काम मुंबई में हुआ है तो उस पर डॉयमंड का चिन्ह होगा, हैदराबाद में बने सिक्के पर स्टार बना होगा, नोएडा में बने सिक्के पर एक बिंदु होगा। यदि आपको किसी सिक्के पर कोई चिन्ह ना मिले तो इसका मतलब है कि वह कोलकाता में बनाया गया है।  
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