विडंबना नहीं तो क्या है राफेल डील से बाहर की गई सरकारी क्षेत्र की सबसे बड़ी रक्षा कंपनी हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) पर अपनी ही सरकार को शायद भरोसा नहीं है, जबकि रक्षा क्षेत्र में अग्रणी माने जाने वाले अमेरिका, फ्रांस, इजरायल जैसे दो दर्जन से अधिक देशों की एयरक्राफ्ट बनाने वाली कंपनियों को अपना ग्राहक बनाने वाली एचएएल को अब तक 30 से ज्यादा पुरस्कार मिल चुके हैं।
अगर कंपनी का ट्रैक रिकॉर्ड देखें तो पता चलता है कि यह वह कंपनी है, जिसने भारतीय सेना को स्वदेश में बने विमानों में उड़ान भरने के लायक बनाया। पिछले 77 साल का इतिहास देखें तो एचएएल ने एक से बढ़कर एक कीर्तिमान स्थापित किए हैं। देश की नवरत्न कंपनियों में शुमार हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को लीजेंड पीएसयू (सार्वजनिक उपक्रम) का भी तमगा मिल चुका है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक एचएएल ने करीब 77 वर्षों के सफर में तीन हजार से भी अधिक विमानों का निर्माण, 3400 से अधिक विमान-इंजनों और 2600 से अधिक इंजनों की मरम्मत की है। इस वक्त आइआइटी मद्रास से एमटेक किए आर माधवन बतौर डायरेक्टर कंपनी का चार्ज संभाल रहे हैं।
राफेल डील से जुड़ी भारत की सबसे बड़ी रक्षा कंपनी एचएएल के बारे में हमने पांच बिंदुओं पर तैयार की ये रिपोर्ट
- एचएएल की उत्पादन क्षमता पर संदेह क्यों?
- दो दर्जन से ज्यादा देश एचएएल के ग्राहक
- जानिए किसने बनाई एचएएल
- एचएल के खास निर्माण
- एचएएल को मिले कई अवार्ड
एचएएल की उत्पादन क्षमता पर संदेह क्यों?
रक्षा मंत्री ने जैसे ही एचएएल की उत्पादन क्षमता पर सवाल उठाए तो एचएएल ने भी जवाब देने में देर नहीं लगाई और बताया कि अब तक का सबसे ज्यादा टर्नओवर दर्ज किया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2017-18 में कुल 18, 283 करोड़ रु की बिक्री की। इससे पिछले साल यानी 2016-17 में यह आंकडा करीब 17,600 करोड़ था।
बेंगलुरू में अपनी 55वीं सालाना जनरल बॉडी मीटिंग में एचएएल ने जो ब्योरा जारी किया है उसके मुताबिक उसने बीते साल कुल मिलाकर 40 विमान तैयार किए हैं। इनमें सुखोई-30 एमकेआई, एलसीए तेजस और डोर्नियर-228 जैसे जहाजों के अलावा एएलएच ध्रुव और चीतल जैसे हेलिकॉप्टर शामिल हैं। कंपनी ने 105 नये इंजन भी बनाए हैं, साथ ही उसने 220 एयरक्राफ्टों और हेलिकॉप्टरों के अलावा 550 इंजनों की मरम्मत का काम भी किया है।
दो दर्जन से ज्यादा देश एचएएल के ग्राहक
एचएएल ने अपनी खूबियों के दम पर अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों की एक नई जमात बना ली है। दो दर्जन से अधिक देशों को विमान से जुड़ी साजो-सामग्री निर्यात करने वाली इस कंपनी के एयरबस इंडस्ट्रीज फ्रांस, बोईंग यूएसए, कोस्ट गार्ड मारीशस, इल्टा, इजराइल एयरक्राफ्ट इंडस्ट्रीज, Ruag, Germany, Rosoboronexport, Russia, Turbomeca, France , Rolls Royce Plc, UK , Honeywell International, USA आदि ग्राहक हैं।
जानिए किसने बनाई एचएएल
एचएएल की मूल कंपनी के संस्थापक रहे उद्ममी वालचंद हीराचंद (फाइल फोटो)।
23 दिसंबर 1940 को देश के माने-जाने उद्ममी वालचन्द हीराचन्द को लगा क्यों न ऐसी कंपनी बनाई जाए, जिससे भारत में ही जहाज बनने लगे। इसी सोच के साथ उन्होंने चार करोड़ रुपये की शुरूआती पूंजी के साथ मैसूर की तत्कालीन सरकार के सहयोग से 23 दिसंबर 1940 को कंपनी की नींव डाली।
1941 में भारत सरकार ने एक तिहाई शेयर खरीद लिया और 1942 में पूरा मैनेजमेट अपने हाथ में ले लिया। फिर अमेरिका की इंटर कॉन्टीनेंटल एयरक्राफ्ट कंपनी के सहयोग से देश की यह कंपनी हॉक फाइटर और बॉम्बर एयरक्राफ्ट बनाने लगी।
1945 में यह कंपनी मिनिस्ट्री ऑफ इंडस्ट्री एंड सप्लाई और फिर जनवरी 1951 में इसे मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस के अधीन कर दिया गया। अगस्त 1951 में एचटी-2 ट्रेनर एयरक्राफ्ट को डिजाइन कर कंपनी ने निर्माण किया। अपने निर्देशन में बने इस विमान को पहली बार डॉ. वीएम घटगे ने उड़ाने में सफलता हासिल की। इसके बाद कंपनी ने करीब डेढ़ सौ ट्रेनर एयरक्राफ्ट बनाकर एयरफोर्स को सप्लाई किए गए। फिर टू सीटर पुष्पक, कृषक, जेट फाइटर मारुत और जेट ट्रेनर किरन नामक एयरक्राफ्ट इस कंपनी ने बनाए।
इस बीच अगस्त 1963 में मिग 21 बनाने के लिए एयरोनॉटिक्स इंडिया लिमिटेड (एआइएल) अस्तित्व में आई। जून 1964 में सरकार ने हिंदुस्तान एयरक्राफ्ट लिमिटेड को एयरोनॉटिक्स इंडिया लिमिटेड के साथ मिला दिया। इस प्रकार हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड का जन्म हुआ।
यह विलय एक अक्टूबर 1964 को हुआ, फिर इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड का नाम मिला। कंपनी का मुख्य काम प्लेन की डिजाइनिंग, मैन्यूफैक्चरिंग, रिपेयरिंग और एयरक्राफ्ट, हेलीकॉप्टर के इंजन की मरम्मत करने का है।
बनाए कमाल के हेलीकॉप्टर, खास उत्पादों के बारे में जानिए
हिंदुस्तान एयरनॉटिक्स ने कई शानदार हेलीकॉप्टर बनाए हैं, जो भारतीय वायुसेना के लिए काफी उपयोगी हैं। इसमे ध्रुव हैलीकॉप्टर भारत का एक बहूद्देशीय हैलीकॉप्टर है। इजरायल जैसा देश भी इस विमान को भारत से खरीद चुका है। वहीं एचएएल रुद्र एचएएल ध्रुव का एक सशस्त्र संस्करण है।
इसी तरह एचएएल ने तेजस नामक लड़ाकू विमान बनाया। दिसंबर 2009 में गोवा समुद्र स्तरीय उड़ान परीक्षण के दौरान, तेजस ने 1,350 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति से उडा़न भरी। यह देश में बना पहला सुपरसॉनिक लड़ाकू विमान है।
फ्लाइट इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक एचएएल वर्ष 2016 में राजस्व के मामले में दुनिया की 39वीं सबसे बड़ी एरोस्पेस कंपनी रही है। कंपनी एयरक्राफ्ट की डिजाइनिंग और डेवेलपमेंट कारोबार में है। कंपनी हेलिकॉप्टर, एरो इंजन का विनिर्माण, रिपेयरिंग भी करती है। देशभर में इसके 20 प्रोडक्शन डिवीजन और 11 रिसर्च डिजाइन सेंटर हैं। यह 13 से भी ज्यादा देशों में अपने उत्पाद व सेवाओं का निर्यात करती है।
एचएएल को मिले कई अवार्ड
एचएएल को कई अवार्ड मिल चुके हैं। अंतर्राष्ट्रीय सूचना एवं विपणन केन्द्र ने मेसर्स ग्लोबल रेटिंग, यूके के संयोजन में मेसर्स हिन्दुस्तान एरोनाटिक्स लिमिटेड को 2003 में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में इंटरनेशनल गोल्ड मेडल से सम्मानित किया था। इसके अलावा कंपनी को 2013 में देश की नवरत्न कंपनियों में से इसको लीजेंड पीएसयू का अवार्ड मिल चुका है।
कंपनी को रिसर्च एंड डिजाइन, टेक्नॉलजी, मैनेजेरियल, एक्सपोर्ट्स, एनर्जी, क्वालिटी के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय से लेकर राष्ट्रीय अवार्ड मिल चुके हैं। 2015-16 में एक्सीलेंस परफार्मस पर 2007-08, 2009-10, 2010-11स 2012-13 और 2015-16 में रक्षा मंत्रालय की ओर से रक्षा मंत्री अवार्ड मिल चुका है।