कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और उनके सांसद बेटे जयवर्धन सिंह के बारे में तो आपको खूब सुना होगा। आज हम आपको उनके बेटे की पत्नी यानी दिग्विजय सिंह की बहू सृजाम्या सिंह के बारे में बताने जा रहे हैं। जयवर्धन और बिहार के डुमरिया शाही घराने की राजकुमारी सृजाम्या की शादी 19 मई, साल 2015 में हुई थी।
सृजाम्या जयवर्धन से आयु में पांच साल छोटी हैं। मध्यप्रदेश में मंत्रिमंडल के शपथ वाले दिन सृजाम्या भी भोपाल आई थीं। जयवर्धन विधानसभा के लिए राघौगढ़ सीट से लगातार दूसरी बार विधायक बने हैं। अपने पति को जिताने के लिए सृजाम्या ने काफी जोर शोर से प्रचार किया था।
अपने जन्मदिन के दिन भी सृजाम्या ने गांव वालों की मौजूदगी में केक काटा और बर्थविश के तौर पर पति के लिए वोट की मांग की। उन्होंने लोगों से पूछा कि उन्हें उनके पति का काम कैसा लगा। उनका कहना है कि वह अपने पति के निर्वाचन क्षेत्र कई बार जा चुकी हैं और वहां के लोग उनके परिवार की तरह हैं।
राघौगढ़ के लोगों से उनका बेहद अच्छा जुड़ाव है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के गृह नगर राघौगढ़ में उनका ऐतिहासिक किला भी है। वहीं उनका परिवार निवास करता है। सृजाम्या का परिवार काफी समय से राजनीति से जुड़ा है। उनके दादा रणविजय सिंह आरजेडी का मुख्य चेहरा रह चुके हैं और दो बार बिहार विधानसभा में विधायक रह चुके हैं। उनके परदादा शत्रुमर्दन शाही पूर्व शिक्षा मंत्री रह चुके हैं।
तीन बार मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय का बिहार से पुराना नाता है। उनकी दादी वहीं की रहने वाली थीं। वह मुख्यमंत्री रहते हुए भी कई बार बिहार जाते रहे हैं। आज भी उन्हें राघौगढ़ के लोग राजा कहकर संबोधित करते हैं। उनके बेटे जयवर्धन ने देहरादून के स्कूल से शिक्षा प्राप्त करने के बाद आगे की पढ़ाई अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी से की है।
सृजम्या ने अजमेर के मायो कॉलेज गर्ल्स से पढ़ाई की है। उन्होंने प्रमुख चार्टर्ड कंपनी ठाकुर, वैद्यनाथ अइयर एंड सीओ के साथ काम किया है। इस कंपनी के संस्थापक पूर्व गृह मंत्री रामेश्वर ठाकुर थे। अभी वह अपने पति का राजनीति में पूरा सहयोग कर रही हैं।
उनके निवास स्थान राघौगढ़ में भी लोग अपनी समस्याओं के निवारण के लिए उनसे मिलने आते हैं। शाही तौर तरीकों से बड़ी हुई सृजाम्या लोगों की परेशानियों को काफी आराम से सुनती हैं। वह अपने पति के निर्वाचन क्षेत्र में उनके बिना भी जाती रहती हैं और लोगों से मुलाकात करती हैं।