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खालिस्तान: 'रॉ' ही 'मोसाद' है, निज्जर की मौत पर इस्राइल की खुफिया विंग से होने लगी भारतीय एजेंसी की तुलना

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 19 Sep 2023 07:24 PM IST

सार

Khalistan: इस्राइल की खुफिया एजेंसी 'मोसाद' है। खुफिया संग्रह, गुप्त ऑपरेशन, और आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए 'मोसाद' की स्थापना की गई थी। यूं कहें कि मोसाद का जन्म ही आतंकवाद से लड़ने के लिए हुआ था। मोसाद के बारे में कहा जाता है कि उसने कई देशों में अपने दुश्मनों को खत्म किया है...
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Canada: Hardeep Singh Nijjar - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

इन घटनाओं के बीच सोशल मीडिया पर 'रॉ' ही 'मोसाद' है, इस्राइल की खुफिया विंग, जिसे 'किलिंग मशीन' भी कहा जाता है, उसके साथ भारतीय एजेंसी की तुलना होने लगी।

जब दूसरे मुल्कों में कम अंतराल पर मारे गए थे आतंकी

बता दें कि पिछले चार माह के दौरान विदेशी धरती से भारत में आतंकवाद फैलाने वाले कई खालिस्तानी आतंकी, बारी-बारी गिरने लगे थे। वे संदिग्ध परिस्थितियों में अज्ञात हमलावरों की गोली का निशाना बन गए। खासतौर पर ब्रिटेन, कनाडा, आस्ट्रेलिया, पाकिस्तान और यूएस में बैठे कई खालिस्तानी आतंकियों को यह गलतफहमी थी कि भारतीय एजेंसियां, उन तक नहीं पहुंच सकतीं। किसान आंदोलन में लोगों को तोड़फोड़ के लिए उकसाने और उसके बाद दर्जनों बार केंद्र सरकार के खिलाफ भड़काने वाले ऑडियो-वीडियो टेप भेजने वाले खालिस्तानी आतंकवादी एवं सिख फॉर जस्टिस के संस्थापक 'गुरपतवंत सिंह पन्नू' भी उस वक्त भूमिगत हो गया था। सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े लोगों ने यह आशंका जताई थी कि खत्म होने वाले आतंकियों की सूची में अगला नंबर गुरपतवंत सिंह पन्नू का हो सकता है। पन्नू के ब्रैम्पटन 'कनाडा' में कहीं पर छिपने की बात सामने आई थी।

खालिस्तान समर्थकों का पसीना छूटने लगा

विदेशी मुल्कों से भारत में आतंकवाद फैलाने वाले दो मोस्ट वांटेड खालिस्तानी आतंकियों का '120' घंटे के भीतर मारे जाना, यह एक बड़ी घटना थी। तब भी सोशल मीडिया पर यह ट्रेंड होने लगा कि भारतीय खुफिया एजेंसी 'रॉ', अब देश के दुश्मनों को विदेशों में जाकर खत्म कर रही है। हालांकि सरकार की ओर से ऐसे मामलों में कोई भी आधिकारिक टिप्पणी जारी नहीं की जाती। 15 जून को बर्मिंघम के एक अस्पताल में खालिस्तानी आतंकी अवतार सिंह खांडा की मौत हो गई थी। उसने लंदन स्थित भारतीय दूतावास पर राष्ट्रीय ध्वज को उताकर उसका अपमान किया था। इसके बाद 19 जून को कुख्यात खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की कनाड़ा में मौत हो गई। वह दो अज्ञात बंदूरधारियों की गोलियों का निशाना बना। ये दोनों आतंकी, एनआईए की मोस्ट वांटेड टेरेरिस्ट लिस्ट में शामिल थे। हरदीप सिंह निज्जर पर तो एनआईए ने दस लाख रुपये का इनाम रखा था। महज 120 घंटे में दो आतंकियों का मारे जाना, इसके बाद कनाडा और दूसरे मुल्कों में बैठे खालिस्तान समर्थकों का पसीना छूटने लगा।

विदेशों में ये आतंकी खुद को महफूज मान रहे थे

खालिस्तानी आतंकी, विशेषकर ब्रिटेन और कनाडा में खुद को महफूज मान रहे थे। खालिस्तानी गतिविधियों को लेकर इन दोनों देशों की सरकारों के साथ भारत अपनी नाराजगी जाहिर कर चुका था। अवतार सिंह खांडा, जिसने लंदन में स्थित भारतीय दूतावास पर तिरंगे को उतारने का दुस्साहस किया था, वह खुलेआम घूमता रहा। भारत सरकार ने पिछले साल गुरपतवंत सिंह के खिलाफ इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने का आग्रह किया था, जिसे स्वीकार नहीं किया गया। मोस्ट वांटेड खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की मौत के बाद गुरपतवंत सिंह भूमिगत हो गया। पन्नू को पाकिस्तानी आईएसआई का पूर्ण समर्थन हासिल है। उसने खालिस्तान के मुद्दे पर जनमत संग्रह को लेकर पाकिस्तान की यात्रा की थी। इस दौरान आईएसआई व उसके गुर्गें आतंकी संगठनों के सदस्यों के साथ पन्नू की मुलाकात हुई।

इतने कम समय में खत्म हो गए थे आतंकी

गृह मंत्रालय द्वारा पन्नू को यूएपीए के तहत आतंकी घोषित किया गया है। पंजाब और हरियाणा में भी पन्नू के खिलाफ केस दर्ज हैं। इसके बावजूद उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो सकी। वजह, पन्नू भारत का नागरिक नहीं है। 'पन्नू' कभी अमेरिका में रहता तो कभी ब्रिटेन व कनाड़ा में। वहां से पन्नू खालिस्तानी आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। पन्नू के पास वहां की नागरिकता है। निज्जर और खांडा से पहले खालिस्तानी आतंकी परमजीत सिंह पंजवार 6 मई 2023 को पाकिस्तान के लाहौर में मारा गया था।। बशीर अहमद पीर रावलपिंडी में मारा गया। एलईटी आतंकी अब्दुल सलाम भट्टावी भी मई 2023 में पाकिस्तान में मारा गया। इनके अलावा भारत में आतंक फैलाने वाला खालिद रजा को कराची में गोली मारी गई थी।

'मोसाद' को कहा जाता है 'किलिंग मशीन'

इस्राइल की खुफिया एजेन्सी 'मोसाद' है। खुफिया संग्रह, गुप्त आपरेशन, और आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए 'मोसाद' की स्थापना की गई थी। यूं कहें कि मोसाद का जन्म ही आतंकवाद से लड़ने के लिए हुआ था। मोसाद के बारे में कहा जाता है कि उसने कई देशों में अपने दुश्मनों को खत्म किया है। इसके नाम से ही बड़े-बड़े आतंकी कांपते हैं। केवल आतंकी संगठन ही नहीं, बल्कि उनके आका भी 'मोसाद' से खौफ खाते हैं। अधिकांश देशों में मोसाद ने अपने गुप्तचर तैनात कर रखे हैं। यह एजेंसी अपने देश के दुश्मनों के खिलाफ एक किलिंग मशीन की तरह काम करती है। मंगलवार को सोशल मीडिया के एक्स प्लेटफार्म पर 'रॉ' ही 'मोसाद है', ट्रेंड होने लगा। लोगों ने एक्स पर लिखा, 'रॉ' ही 'मोसाद है'। अब भारत के दुश्मन किसी भी देश में हों, उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा। जिस तरह से इस्राइल की खुफिया एजेंसी, मोसाद अपने दुश्मनों को उनके ही देश में घुसकर चुन-चुनकर मारने के लिए जानी जाती है, अब रॉ भी उसी रास्ते पर है।

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