हरियाणा और जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव की घोषणा हो गई है। जम्मू कश्मीर में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव होने जा रहा है। 2014 के विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में बहुत कुछ बदल चुका है। सियासी ही नहीं, भौगोलिक रूप से भी जम्मू कश्मीर में बदलाव आए हैं। वहीं, हरियाणा में लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के बीच कांटे की लड़ाई दिख रही है। इस हफ्ते के ‘खबरों के खिलाड़ी’ में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, समीर चौगांवकर, विनोद अग्निहोत्री, अवधेश कुमार, राखी बख्शी और राकेश शुक्ल मौजूद रहे।
समीर चौगांवकर: जम्मू कश्मीर का पूरा ढांचा बदल चुका है। सीटों का परिसीमन नए सिरे से हो चुका है। जम्मू कश्मीर दो हिस्से में बदल चुका है। सीटों की संख्या भी बढ़कर 90 हो गई है। अनुच्छेद 370 के निष्प्रभावी होने के बाद पहली बार चुनाव होने जा रहे हैं। भाजपा जम्मू की अधिकतम सीटें जीतने की कोशिश करेगी। वहीं, पीडीपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस जैसी पार्टियां कश्मीर के जरिए सत्ता में आना चाहेंगी। आने वाले समय में जो सरकार बनेगी, उसे प्रदेश के हित में काम करना होगा।
विनोद अग्निहोत्री: जम्मू कश्मीर में चुनावों का स्वागत किया जाना चाहिए। वहां की जनता को भी लोकतांत्रिक सरकार का अधिकार है। 2018 में वहां सरकार गई और उसके बाद चुनाव नहीं हुए। लोकसभा चुनाव में वहां के लोगों ने अच्छी संख्या में मतदान किया। विधानसभा चुनाव में भाजपा कश्मीर में कितनी सीटों पर लड़ेगी, यह देखना होगा। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उम्मीदवार नहीं उतारे थे। महत्वपूर्ण ये है कि जम्मू कश्मीर में चुनावी मुद्दा क्या होगा? मुझे लगता है कि राजनीतिक दल वहां पर राज्य बहाली के मुद्दे को सबसे ज्यादा उठाएंगे। इस चुनाव का वैश्विक महत्व है। इस चुनाव के जरिए भारत दुनिया को जवाब देगा।
हरियाणा इसलिए महत्वपूर्ण है कि लोकसभा चुनाव के नतीजों में दोनों प्रमुख दलों को पांच-पांच सीटें मिली थीं। आम आदमी पार्टी अगर अलग लड़ती है तो क्या इससे भाजपा को नुकसान होगा, यह देखना होगा।
राखी बख्शी: आतंकवाद को हटाने का मुद्दा भी इस चुनाव में होगा। अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद बहुत सारी चीजें बदली हैं। जब मतदान होगा, तब यह समझ आएगा कि इन बदलावों का कितना असर हुआ है। सज्जाद लोन से लेकर गुलाम नबी आजाद तक की पार्टियों की भूमिका भी देखनी होगी। पीडीपी को देखें तो महबूबा के साथ उनकी बेटी भी सक्रिय हैं। इसी तरह नेशनल कॉन्फ्रेंस में भी चुनाव की पूरी तैयारी है। बाकी सभी दल भी तैयारी कर रहे हैं। तीन चरणों के चुनाव में पार्टियां किस तरह प्रदर्शन करती हैं, यह देखना होगा।
राकेश शुक्ल: जम्मू कश्मीर में परिसीमन के बाद स्थिति बहुत बदली है। वोट का जो अधिकार होता है, उसकी एकजुटता का प्रदर्शन इस चुनाव में दिखाई देगा। लोकसभा चुनाव में जम्मू कश्मीर के तीन बड़े चेहरे तीनों हारे थे। लोकसभा चुनाव में रिकॉर्ड मतदान हुआ। हरियाणा में दोनों ओर चुनौती है। भाजपा के लिए भी और कांग्रेस के लिए भी अपनी चुनौतियां है। हरियाणा में अलग-अलग सीटों के अलग-अलग समीकरण हैं। इसके बाद भी हरियाणा में भाजपा और कांग्रेस दोनों में कांटे की लड़ाई है।
अवधेश कुमार: जम्मू कश्मीर को बाकी राज्यों की तरह नहीं देखना चाहिए। अनुच्छेद 370 के हटने के बाद जिस नए वातारण में जम्मू कश्मीर को लाने की कोशिश की गई, क्या वह हो गया, यह देखना होगा। एक नए वातावरण में यह चुनाव हो रहा है। कई कानून लागू हुए हैं। राजनीतिक सोच कितनी बदली है यह देखना होगा। कश्मीर को भी सामान्य धारा में लाने का यह प्रयास है। इस चुनाव में क्या होता है यह देखना होगा।
रामकृपाल सिंह: लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण के दौरान पहली बार मैंने देखा था जब जम्मू कश्मीर में मतदान प्रतिशत महाराष्ट्र जैसे राज्य से भी ज्यादा था। मैं इस चुनाव को इस मामले में देखूंगा कि मतदाताओं की सहभागिता कितनी होती है। हरियाणा के चुनाव नतीजों में यह देखा जाएगा कि विपक्षी गठबंधन और मोदी सरकार के बीच की तकरार आगे कितनी बढ़ेगी। क्या मोदी पांच साल पूरे कर पाएंगे इस पर भी बहस हरियाणा चुनाव के नतीजों के बाद फिर शुरू होगी।