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Khabaron Ke Khiladi: हर दिन हो रही जासूसों की गिरफ्तारी, विश्लेषकों ने बताया सरकार के लिए ये कितनी बड़ी चुनौती

Sat, 24 May 2025 04:57 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश से हालिया दिनों में कई कथित जासूसों की गिरफ्तारी की खबरें सामने आई हैं। कहा जा रहा है कि इन आरोपियों ने पहलगाम हमले से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तक पाकिस्तानी जासूसों को सुरक्षा से जुड़ी कई जानकारियां मुहैया कराईं। 
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पंजाब, हरियाणा से उत्तर प्रदेश तक पुलिस ने गिरफ्तार किए हैं कई कथित जासूसी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश में ऑपरेशन सिंदूर के बाद एजेंसियों की कार्रवाई शुरू हुई। इस कार्रवाई में एक के बाद एक कई ऐसे लोग गिरफ्तार किए गए जिन पर एजेंसियों को जासूसी का शक है। हर रोज एक नई गिरफ्तारी हो रही है। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, समीर चौगांवकर, पूर्णिमा त्रिपाठी, हर्षवर्धन त्रिपाठी और राजकिशोर मौजूद रहे। 
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राजकिशोर: जिस तरह की चीजें दिखाई दे रही हैं, स्थिति उससे ज्यादा गंभीर है। अब तक जो गिरफ्तारियां होती थीं वो किसी आतंकी संगठन से जुड़े लोगों की होती थीं। इस बार जो नाम आ रहे हैं वो बिलकुल अलग है। इस चीज को समझना पड़ेगा। जब से मोबाइल लोगों के हाथ में आ गया तब से लोग ब्रॉडकास्टर तो हो गए लेकिन पत्रकार नहीं हो सके। कंटेंट क्रिएटर तो बहुत से हो गए लेकिन ये पत्रकार नहीं हो सके। पहलगाम की घटना पर कई सवाल उठते हैं। उप राज्यपाल का ऑफिस क्या कर रहा था? गृह मंत्रालय क्या कर रहा था? ये सब सवाल भी उठेंगे। 
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समीर चौगांवकर: जिस तरह से तकनीक बढ़ी है, उससे सरकार के लिए चुनौतियां भी बढ़ीं हैं। मुझे लगता है कि सरकार को इसे रोकने के लिए बड़ा संसाधन डालना पड़ेगा। जिससे देश की सुरक्षा लीक नहीं हो। सरकार को सेना के अंदर जो काम कर रहे हैं, जो बाहर लोग काम कर रहे हैं और सूचना लीक कर रहे हैं। उन्हें रोकने के लिए सरकार को बड़े कदम उठाने होंगे। 

पूर्णिमा त्रिपाठी: सरकार के इंटेलिजेंस विंग को सोशल मीडिया अकाउंट्स पर नजर रखनी चाहिए। जो लोग पकड़े गए हैं उनसे पाकिस्तान को कौन सी वाइटल जानकारी मिली होगी यह देखना होगा। यूट्यूबर्स के पास कितनी सूचनाएं होंगी और पाकिस्तान इनका कैसे इस्तेमाल कर सकता है यह भी देखना होगा। पकड़े गए लोग किस तरह की सूचनाएं दे रहे थे उसे देखना होगा।  

समीर चौगांवकर: जिस तरह से तकनीक बढ़ी है, उससे सरकार के लिए चुनौतियां भी बढ़ीं हैं। मुझे लगता है कि सरकार को इसे रोकने के लिए बड़ा संसाधन डालना पड़ेगा। जिससे देश की सुरक्षा लीक नहीं हो। सरकार को सेना के अंदर जो काम कर रहे हैं, जो बाहर लोग काम कर रहे हैं और सूचना लीक कर रहे हैं, उन्हें रोकने के लिए सरकार को बड़े कदम उठाने होंगे। 

पूर्णिमा त्रिपाठी: सरकार के इंटेलिजेंस विंग को सोशल मीडिया अकाउंट्स पर नजर रखनी चाहिए। जो लोग पकड़े गए हैं, उनसे पाकिस्तान को कौन सी महत्वपूर्ण जानकारी मिली होगी यह देखना होगा। यूट्यूबर्स के पास कितनी सूचनाएं होंगी और पाकिस्तान इनका कैसे इस्तेमाल कर सकता है यह भी देखना होगा। पकड़े गए लोग किस तरह की सूचनाएं दे रहे थे उसे देखना होगा।  
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हर्षवर्धन त्रिपाठी: हमारे लिए देशद्रोह बड़ी चीज होती है। मैं ये नहीं मानता कि हमारी इटेंलिजेंस एजेंसियां सक्षम नहीं है। इसके बाद भी कभी कुछ  चीजें छूट जाती हैं। यह देखने की बात होगी कि क्या नरेटिव वॉर में देश का विमर्श कमजोर करने की कोशिश तो नहीं हो रही है। इस पर सरकार को देखने की जरूरत है। 

रामकृपाल सिंह: जब से यह दुनिया बनी है तब से जासूसी होती रही है। जासूस एक दूसरे की सूचनाएं पहुंचाते हैं। जिस दौर में जिस तरह की तकनीक होती है उसी तरह की सूचनाएं जासूस पहुंचाते हैं। किसी भी तकनीक के इस्तेमाल से ज्यादा उसके दुरुपयोग की संभवनाएं बहुत ज्यादा होती हैं। यह तय है कि जब तक लोकल सपोर्ट नहीं होगा तब तक कोई चीज सफल नहीं होती है। यह हर जगह है। जितनी तेजी से तकनीक बढ़ रही है उसका दुरुपयोग भी बढ़ रहा है। 
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