लोक लेखा समिति, सार्वजनिक उपक्रम समिति और प्राक्कलन समिति संसद की प्रमुख वित्तीय समितियां हैं। इनका काम सरकार के खातों और सार्वजनिक उपक्रमों के कामकाज पर नजर रखना है।
संसदीय समितियों का गठन हो गया है। इसमें कांग्रेस समेत विपक्षी दलों को उचित स्थान मिला है। लोक लेखा समिति (पीएसी) की अध्यक्षता कांग्रेस के पाले में गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल पीएसी के अध्यक्ष बनाए गए हैं। हालांकि, भाजपा के हिस्से में अधिकांश संसदीय समितियों की अध्यक्षता आई है।
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इन लोगों को मिली यह जिम्मेदारी
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संजय जायसवाल प्राक्कलन समिति की अध्यक्षता करेंगे, जबकि उनके पार्टी सहयोगी बैजयंत पांडा सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति की अध्यक्षता करेंगे। बता दें, लोक लेखा समिति, सार्वजनिक उपक्रम समिति (सीओपीयू) और प्राक्कलन समिति संसद की प्रमुख वित्तीय समितियां हैं, जिनका काम सरकार के खातों और सार्वजनिक उपक्रमों के कामकाज पर नजर रखना है।
तीनों समितियों का एक साल का कार्यकाल
लोकसभा सचिवालय ने शुक्रवार को एक बुलेटिन जारी कर संसदीय समितियों के गठन की घोषणा की। तीनों समितियों का कार्यकाल एक वर्ष का होता है और इनमें लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सदस्य शामिल होते हैं, जिनका चयन दोनों सदनों द्वारा किया जाता है। इनके अलावा, विभाग-संबंधी अन्य स्थाई समितियां भी हैं, जो विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों पर नजर रखती हैं।
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इन्हें भी मिली जिम्मेदारी
इसके अलावा, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अनुसूचित जाति (एससी) एवं अनुसूचित जनजाति (एसटी) के कल्याण के लिए भी समितियां गठित की गई हैं। ओबीसी कल्याण समिति के अध्यक्ष भाजपा के गणेश सिंह होंगे, जबकि उनके पार्टी सहयोगी फग्गन सिंह कुलस्ते एससी और एसटी कल्याण समिति के अध्यक्ष होंगे।