ओमान में एक सड़क दुर्घटना में पति की मृत्यु के 10 वर्ष बाद भी मुआवजा नहीं मिलने पर पत्नी ने मदद के लिए केरल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। 2010 में पुलिककोटिल वरुथुन्नी शिजू अल एकटिस्यून ट्रेडिंग कंपनी में इलक्ट्रीशियन के तौर पर काम करने ओमान गए थे।
दूतावास लड़ रहा है नियोक्ता कंपनी के खिलाफ मुकदमा
करीब एक वर्ष बाद काम के दौरान हुए एक हादसे में उनकी मौत हो गई। उनकी पत्नी शिजी शिजू नंबाझिक्कड़, त्रिशूर में दो बच्चों और ससुर के साथ रहती है। ओमान में पति की मौत के बाद ओमान स्थित भारतीय दूतावास से सूचना मिली कि पति की मौत का मुआवजे की प्रक्रिया जारी है, अदालती कार्रवाई के लिए उनसे पॉवर ऑफ अटॉर्नी मांगी गई।
लेकिन, अब तक कुछ भी हासिल नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि इब्राहिम नाम के व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया। खुद को उस कंपनी का मैनेजर बताया, जहां मेरेे पति काम करते थे। उसने पति के वेतन के एरियर के तौर पर कुछ रकम देने की पेशकश की। लेकिन, उन्होंने स्वीकरने से मना कर दिया। इसके बाद त्रिशूर के सांसद टीएन प्रथापन के संपर्क में आईं और विदेश मंत्री से हस्तक्षेप की मांगी की।
मंत्रालय ने सांसद को बताया कि दूतावास 2011 से ही ओमान की एक अदालत में केस लड़ रहा है। दूतावास ने नियोक्ता का पता भी लगाया था, लेकिन अदालत ने जानकारी को अपर्याप्त बताया था। लॉ फर्म को मामला सौंपा गया है। 19 अक्तूबर को सुनवाई होनी है।