केरल के वायनाड से जंगली जानवरों द्वारा लोगों पर हमले करने की लगातार खबरें आ रही हैं। क्षेत्र में मानव-पशु संघर्ष के स्थाई समाधान की मांग को लेकर हाल ही में विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा बुलाई गई हड़ताल ने हिंसक रूप ले लिया था, फिर भी कोई समाधान नहीं निकल सका। इसी मामले को लेकर हाईकोर्ट ने कह दिया है कि मानव द्वारा बनाई गई क्षेत्रीय सीमाएं मानव-पशु संघर्षों को हल करने में मदद नहीं करती हैं। ऐसे हमलों को केवल ठोस प्रयासों से ही नियंत्रित किया जा सकता है।
27 फरवरी के लिए सूचीबद्ध किया
हाईकोर्ट ने सुझाव दिया कि केरल के वायनाड जिले में जंगली जानवरों के घुसपैठ के मुद्दे से निपटने के लिए केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक द्वारा अतिरिक्त मुख्य सचिवों के स्तर पर एक संयुक्त कार्य योजना तैयार की जानी चाहिए। साथ ही अदालत ने मामले को आगे के विचार के लिए 27 फरवरी के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
संयुक्त समितियों का गठन हो
न्यायमूर्ति ए के जयशंकरन नांबियार और न्यायमूर्ति गोपीनाथ पी की विशेष पीठ का विचार था कि राज्य सरकारों के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिवों के स्तर पर संयुक्त चर्चा करना सही होगा ताकि उच्च अधिकारियों से मंजूरी लिए बिना जल्द फैसले लिए जा सकें। पीठ ने कहा कि उम्मीद है कि जल्द ऐसी संयुक्त समितियों का गठन किया जाएगा।
इसने मुख्य वन संरक्षक, वन्यजीव, उत्तरी सर्कल, वायनाड को उन खाइयों, बाधाओं और बाड़ का एक नक्शा तैयार करने का भी निर्देश दिया, जो उत्तर और दक्षिण वन्यजीव प्रभागों के अधिकार क्षेत्र में निजी व्यक्तियों और सरकार द्वारा लगाए गए हैं।
पीठ ने 19 फरवरी के अपने आदेश में निर्देश दिया कि नक्शा 10 दिनों के भीतर तैयार किया जाए और मानव-पशु संघर्ष से निपटने के लिए पिछले साल मार्च में अदालत द्वारा गठित समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।