कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के नजदीक शराब का एक ठेका है, जहां लोग अब भी फुटपाथ पर कतार में खड़े दिखते हैं, जबकि कोर्ट ने इसे रोकने के लिए कई निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने आबकारी विभाग को नौ नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर एक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
केरल हाई कोर्ट ने गुरुवार को एक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि शराब के ठेकों के बाहर खड़े लोग समानतावादी हैं। उनमें कोई भी गरीबी नहीं है। कोई भी व्यक्ति किसी तरह की सब्सिडी नहीं मांग रहा है। कोई भी आरक्षण की मांग नहीं कर रहा है। ग्राहक धैर्यपूर्वक और शांतिपूर्ण तरीके से दुकानों के बाहर कतारबद्ध खड़े देखे जा सकते हैं। अदालत ने कहा कि इन ठेकों के बाहर भीड़ घटाने का एकमात्र विकल्प 'वॉक इन शॉप' है।
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न्यायमूर्ति दीवान रामचंद्रन ने कहा कि शराब ठेकों के बाहर कोई गरीबी नहीं है। कोई भी व्यक्ति सब्सिडी या आरक्षण नहीं चाहता। यह बहुत ही समानतावादी है। हर कोई शांतिपूर्वक और धैर्यपूर्वक कतार में खड़ा है। कोर्ट ने कहा कि जब तक आपके पास अन्य सामान की तरह दुकानें नहीं होंगी, चीजें ठीक नहीं हो सकती। इसे भी अन्य दुकानों की तरह ही बनाने की कोशिश की जाए।
कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के नजदीक शराब का एक ठेका है, जहां लोग अब भी फुटपाथ पर कतार में खड़े दिखते हैं, जबकि कोर्ट ने इसे रोकने के लिए कई निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने आबकारी विभाग को नौ नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर एक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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दरअसर, केरल हाई कोर्ट में एक अवमानना याचिका दायर की गई थी, जिसमें कोर्ट 2017 के फैसले का अनुपालन नहीं हो रहा है। इस फैसले में कोर्ट ने राज्य सरकार और अन्य को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि दुकानों की वजह से त्रिशूर के एक इलाके में कारोबार और निवासियों को किसी तरह की असुविधा न हो।