डॉ. पीके वारियर
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दुनिया भर में केरल के उपचार के पारंपरिक तरीके को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले आयुर्वेद के अग्रणी डॉ. पीके वारियर का 100 वर्ष की उम्र में कोट्टक्कल में उनके घर पर निधन हो गया। वे कोट्टक्कल आर्य वैद्य शाला के मुख्य चिकित्सक और प्रबंध न्यासी थे। यह देश की प्रमुख आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवा श्रृंखलाओं में से एक है।
सीएम पिनराई बोले-पैसे को इलाज में बाधक नहीं माना
शनिवार को डॉ. वारियर के निधन के बाद केरल के सीएम पिनराई विजयन ने फेसबुक पर लिखा, 'उन्होंने मानवता को चिकित्सा विज्ञान के साथ जोड़ा। इस विचार के साथ कि पैसा इलाज के लिए बाधा नहीं होना चाहिए, उन्होंने आयुर्वेद के सिद्धांतों को समाज में जमीनी स्तर पर लाया। राष्ट्रों के मुखियाओं से लेकर अनाथों और परित्यक्त लोगों तक, लोग इलाज के लिए उनके पास पहुंचे। उन्होंने चिकित्सा समुदाय की मदद से उन्हें इलाज और करुणा दी।'
इससे पहले जून में मुख्यमंत्री विजयन ने डॉ. वारियर के शताब्दी जन्मदिन समारोह का उद्घाटन करते हुए कहा था कि दुनिया में बहुत कम लोग डॉ. वारियर जैसे धन्य होंगे। उन्होंने इस अवसर पर कहा था, 'यह न केवल आर्य वैद्य शाला का, बल्कि आयुर्वेद से प्यार करने वाले सभी लोगों का उत्सव है।'