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केरल बजट का नया विवाद: शराब पर टैक्स कटौती से आबकारी मंत्री लिजू ने खींचे हाथ, कहा- वित्त विभाग का है यह फैसला

Thu, 25 Jun 2026 10:26 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, पठानमथिट्टा।

सार

केरल के आबकारी मंत्री एम लिजू ने बजट में कम अल्कोहल वाले पेयों पर टैक्स कम करने के फैसले से पल्ला झाड़ लिया है। उन्होंने इसे पूरी तरह वित्त विभाग का फैसला बताते हुए पूर्ववर्ती एलडीएफ सरकार पर शराब को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। 
 
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एम लिजू, आबकारी मंत्री, केरल - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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केरल की राजनीति में इस समय बजट प्रस्तावों को लेकर घमासान मचा हुआ है। राज्य के आबकारी मंत्री एम लिजू ने सरकार के नए बजट प्रस्ताव से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया है। यूडीएफ सरकार ने अपने ताजा बजट में कम अल्कोहल वाले ड्रिंक्स पर टैक्स घटाने की बात कही है। इस पर आबकारी मंत्री का कहना है कि टैक्स बढ़ाना या घटाना उनका काम नहीं है। यह पूरा अधिकार केवल और केवल वित्त विभाग के पास होता है। आबकारी विभाग का काम तो सिर्फ शराब की बिक्री पर नजर रखना और उसे नियम के दायरे में चलाना है।
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बजट की गोपनीयता और मंत्रियों की लाचारी
पठानमथिट्टा में पत्रकारों ने आबकारी मंत्री से तीखे सवाल पूछे। उनसे पूछा गया कि क्या मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने बजट में इस टैक्स कटौती का एलान करने से पहले उनसे कोई बातचीत की थी? इस पर लिजू ने साफ शब्दों में कहा कि टैक्स से जुड़े प्रस्तावों की जिम्मेदारी सिर्फ वित्त विभाग संभालता है।

बता दें कि मुख्यमंत्री सतीशन के पास ही वित्त मंत्रालय का प्रभार भी है। उन्होंने ही 19 जून को राज्य का बजट पेश किया था। मंत्री लिजू ने दलील दी कि बजट बनाने में गोपनीयता रखना एक स्थापित परंपरा है। इसलिए वित्त विभाग के लिए यह कतई जरूरी नहीं है कि वह टैक्स प्रस्तावों की जानकारी दूसरे विभागों को पहले से दे। जब उनसे पूछा गया कि क्या शराब नीति तय होने से पहले ही बजट में जल्दबाजी में यह घोषणा की गई? तो उन्होंने कहा कि नई शराब नीति बनने के इंतजार में संशोधित बजट को छह महीने के लिए टाला नहीं जा सकता था। बजट में राज्य की कमाई बढ़ाने के लिए ऐसे फैसले सामान्य तौर पर लिए जाते हैं।
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शराब ब्रांड का रजिस्ट्रेशन और पुरानी सरकार पर आरोप
आबकारी मंत्री ने केरल के नियमों को समझाते हुए कहा कि राज्य में किसी भी शराब ब्रांड को बेचने के लिए उसका रजिस्ट्रेशन कराना सबसे जरूरी कदम है। चाहे टैक्स का ढांचा कुछ भी हो, बिना ब्रांड रजिस्ट्रेशन के बिक्री नहीं हो सकती। केरल ब्रांड रजिस्ट्रेशन नियमों के तहत सिर्फ आबकारी आयुक्त के पास ही शराब ब्रांड को रजिस्टर करने का असली पावर होता है। जब ब्रांड रजिस्टर हो जाता है और जरूरी परमिट मिल जाता है, तभी उसे बेचा जा सकता है।

इसके बाद मंत्री लिजू ने पूर्ववर्ती एलडीएफ सरकार पर बड़ा सियासी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कम अल्कोहल वाले ड्रिंक्स की बिक्री का रास्ता साफ करने के लिए आबकारी नियमों की धारा 3(1) में संशोधन पुरानी एलडीएफ सरकार ने ही किया था। उसी संशोधन के बाद से केरल में मिलिट्री और पैरामिलिट्री कैंटीन के जरिए ऐसे ड्रिंक्स बेचे जा रहे हैं। कैंटीन में बिक्री के लिए ब्रांड का रजिस्ट्रेशन भी एलडीएफ के कार्यकाल में ही हुआ था। लिजू ने दावा किया कि साल 2016 में जब यूडीएफ सरकार सत्ता से हटी थी, तब राज्य में केवल 20 बार खुले हुए थे। लेकिन आज एलडीएफ की नीतियों के कारण राज्य में बारों की संख्या बढ़कर 917 हो चुकी है।

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सरकारी कंपनी 'जवान रम' का उत्पादन होगा शुरू
आबकारी मंत्री ने राज्य की सरकारी कंपनी 'त्रावणकोर शुगर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड' को लेकर भी बड़ा बयान दिया। तिरुवल्ला में स्थित इस कंपनी में बनने वाली मशहूर 'जवान रम' का उत्पादन कुछ कामकाजी दिक्कतों की वजह से हाल ही में रुक गया था। मंत्री ने कहा कि इस उत्पादन के रुकने के असली कारणों की पूरी जांच की जाएगी और इसे दोबारा नियमित रूप से चालू किया जाएगा।
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उन्होंने बताया कि इस सरकारी फैक्ट्री की क्षमता हर दिन 10,000 बोतल शराब बनाने की है। इसके बावजूद कंपनी ने तीन महीने पहले अपनी एक लीटर वाली बोतलों का उत्पादन बंद कर दिया था और बाद में 750 एमएल की बोतलों का निर्माण भी ठप हो गया था। मंत्री लिजू ने खुद इस फैक्ट्री का दौरा किया है। उन्होंने वहां कंपनी के बड़े अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की है। उन्होंने भरोसा दिया कि इस मुनाफे वाले सार्वजनिक उपक्रम के कामकाज को सुधारने के लिए सरकार हर जरूरी कदम उठाएगी। शराब नीति पर अंतिम फैसला कांग्रेस और यूडीएफ के भीतर आपसी चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।
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