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'ऑपरेशन सिंदूर से मिला सबक': राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बोलीं-आत्मनिर्भरता ही संकट में देश का असली रक्षक

Thu, 25 Jun 2026 09:39 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, नई दिल्ली

सार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया कि किसी भी देश की सैन्य तैयारी और रणनीतिक ताकत के लिए स्वदेशी रक्षा क्षमताएं, आधुनिक तकनीक और मजबूत घरेलू उद्योग बेहद जरूरी हैं। उन्होंने MES के प्रशिक्षु अधिकारियों से आत्मनिर्भरता, सतत विकास और नवाचार को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू - फोटो : ANI
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विस्तार
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आज के दौर में आत्मनिर्भरता सिर्फ विकास का लक्ष्य नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मजबूती की भी अहम जरूरत बन गई है। ऑपरेशन सिंदूर ने यह साफ कर दिया कि किसी देश की सैन्य तैयारी और रणनीतिक प्रभाव को मजबूत बनाने में स्वदेशी रक्षा क्षमताओं की कितनी बड़ी भूमिका होती है। यह बातें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को राष्ट्रपति भवन में मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेज के 2023 और 2024 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए कही। मुर्मू ने आगे कहा कि दुनिया इस समय संघर्षों और भू-राजनीतिक तनावों के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में वही देश ज्यादा मजबूत स्थिति में रहता है, जो अपनी जरूरतों के लिए दूसरों पर कम और खुद पर ज्यादा निर्भर हो। आत्मनिर्भर देश संकट की घड़ी में अपनी आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ विकास संबंधी प्राथमिकताओं को भी बेहतर तरीके से पूरा कर सकता है।

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7 से 10 मई 2025 के बीच हुआ था ऑपरेशन सिंदूर
गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा 7 से 10 मई 2025 के बीच चलाया गया अभियान था। इस दौरान पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद आतंकवादी और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया था। यह कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी। इनमें अधिकांश पर्यटक थे। 

'MES देश के रक्षा ढांचे की रीढ़'
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया कई पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रही है और ऐसे समय में सतत विकास कोई विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन चुका है। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से ग्रीन टेक्नोलॉजी अपनाने, ऊर्जा और पानी की बचत करने, हरियाली बढ़ाने, कचरा कम करने और अपने काम के हर स्तर पर पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने की अपील की। मुर्मू ने कहा कि मजबूत, कुशल और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार इंफ्रास्ट्रक्चर न केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के हितों की भी रक्षा करेगा। उन्होंने कहा कि MES देश के रक्षा ढांचे की रीढ़ है। रणनीतिक महत्व के सैन्य ठिकानों का निर्माण और रखरखाव कर यह संगठन सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाता है।
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'महिलाओं ने देश के संस्थानों को मजबूत बनाया'
राष्ट्रपति ने रक्षा क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सेना, नौसेना, वायुसेना और अन्य रक्षा संगठनों में महिलाएं लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रही हैं और उन जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक निभा रही हैं, जिन्हें कभी उनकी पहुंच से बाहर माना जाता था। महिलाओं की पेशेवर दक्षता, नेतृत्व क्षमता, साहस और समर्पण ने देश के संस्थानों को और मजबूत बनाया है तथा राष्ट्रीय सुरक्षा को नई मजबूती दी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में MES में भी बड़ी संख्या में महिला अधिकारी नजर आएंगी।

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युवा अधिकारियों को दिया संदेश
मुर्मू ने कहा कि विविधता और समावेशिता किसी भी संगठन को अधिक प्रभावी और नवाचारी बनाती है। उन्होंने अधिकारियों से आह्वान किया कि वे अपने कार्यों के माध्यम से न केवल मजबूत और सुरक्षित भारत के निर्माण में योगदान दें, बल्कि स्वच्छ, हरित और टिकाऊ भारत के सपने को भी साकार करें। अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि युवा अधिकारी अपनी मेहनत, नवाचार और सेवा भावना के दम पर MES की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाएंगे और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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