हरिद्वार में आयोजित विहिप के शीर्ष संतों की मार्ग दर्शक मंडल ने एक प्रस्ताव पास कर कहा है कि हिन्दू मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण स्वीकार्य नहीं है। हिन्दू मंदिरों पर हिन्दू संतों और हिन्दू समाज का अधिकार होना चाहिए। विहिप ने यह आग्रह भी किया है कि मंदिरों पर से सरकारी नियंत्रण हटाने के लिए कानूनों में उचित बदलाव भी किया जाना चाहिए।
विहिप के संतों ने माना है कि हिन्दू समाज के लिए मंदिर केवल उपासना का केंद्र ही नहीं रहे हैं। ये समाज जागरण से लेकर राष्ट्र जागरण की भूमिका भी निभाते रहे हैं। पिछले कुछ कालखंड में मंदिरों की भूमिका में कुछ कमी आई है। विहिप संत समाज इस बात की भी कोशिश करेगा कि मंदिरों की पुरानी गौरवशाली भूमिका को समाज में दोबारा स्थापित किया जा सके। विहिप के प्रस्ताव में कहा गया है कि मंदिरों को समाज अभिमुख बनाते हुए धर्म-संस्कृति-समाज के शक्ति-केन्द्र के रूप में पुनः खड़ा करना आज समय की मांग है।
मंदिरों की भूमिका को फिर से स्थापित करने के लिए एक जनजागरण अभियान की आवश्यकता भी जताई गई है। संतों की बैठक में यह प्रस्ताव अखिलेश्वरानंद जी महाराज के द्वारा लाया गया जिसे स्वामी डॉ. श्यामदेवाचार्य जी महाराज ने अनुमोदन किया।