फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Delhi Politics: फिर जनता की अदालत में पेश होंगे पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल, पहली अदालत में पूछे थे कड़े सवाल

सार

इसके पहले शराब घोटाले में 156 दिन जेल में रहकर जमानत पर बाहर आने के बाद अरविंद केजरीवाल ने 22 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर जनता की अदालत लगाई थी। इस अदालत के मंच से ही केजरीवाल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से पांच सवाल पूछे थे। 
विज्ञापन
दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अरविंद केजरीवाल एक बार फिर जनता की अदालत में पेश होंगे। इस बार वे 6 अक्तूबर को छत्रसाल स्टेडियम में जनता की अदालत में पेश होंगे। इसमें बड़ी संख्या में दिल्ली के हर हिस्से से लोगों के पहुंचने की संभावना है। पांच अक्तूबर को हरियाणा में मतदान के बाद की यह तारीख चुनना बताता है कि हरियाणा से फ्री होते ही केजरीवाल दिल्ली के समर में कूदने वाले हैं। उनकी इस अदालत से ही दिल्ली की सियासत में राजनीतिक गर्मी बढ़ने की उम्मीद लगाई जा रही है। 

विज्ञापन


इसके पहले शराब घोटाले में 156 दिन जेल में रहकर जमानत पर बाहर आने के बाद अरविंद केजरीवाल ने 22 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर जनता की अदालत लगाई थी। इसमें भी दिल्ली के लोगों ने बड़ी संख्या में भागीदारी की थी। इस अदालत के मंच से ही अरविंद केजरीवाल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भाजपा से संबंधित पांच सवाल पूछकर दोनों संगठनों को असहज कर दिया था। केजरीवाल ने पूछा था कि क्या संघ भाजपा की इस तरह की कार्यप्रणाली से सहमत है? 

अपनी राजनीति की यात्रा की शुरुआत से ही अरविंद केजरीवाल इस तरह के इनडोर कार्यक्रमों के जरिये जनता के बीच जाते रहे हैं। वे जनता से लगातार यही अपील करते हैं कि शराब घोटाले में उन्हें और उनके सरकार के मंत्रियों-नेताओं को जबरन फंसाया जा रहा है। वे कहते हैं कि यदि जनता उन्हें ईमानदार समझती है तो उन्हें समर्थन दे, यदि वह उन्हें गुनहगार समझती है तो वह उन्हें समर्थन न दे। 
विज्ञापन


माना जाता है कि इस तरह वे दिल्ली सरकार के कथित शराब घोटाले पर जनता की क्लीन चिट मांगते हैं। अभी से यह माना जा रहा है कि यदि दिल्ली के चुनाव में आम आदमी पार्टी एक बार फिर मजबूत जीत हासिल करने में सफल हो जाती है तो इसे एक तरह से शराब घोटाले पर केजरीवाल को जनता की क्लीन चिट की तरह देखा जाएगा। लेकिन यदि आम आदमी पार्टी को दिल्ली में हार का सामना करना पड़ता है तो उसके नेताओं की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।     
विज्ञापन


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें