कठुआ गैंगरेप और हत्या मामले में वकीलों द्वारा अभियोजन पक्ष को चार्जशीट दायर करने में रुकावट पैदा करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए इस मामले का परीक्षण करने का निर्णय लिया है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में बार कौंसिल ऑफ इंडिया, जम्मू-कश्मीर बार कौंसिल, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (जम्मू) और कठुआ बार एसोसिएशन को नोटिस जारी किया है। वहीं जम्मू एवं कश्मीर सरकार ने बताया कि नौ अप्रैल को इस मामले में चार्जशीट दायर की जा चुकी है।
वकीलों के एक समूह द्वारा कठुआ में हुई घटना से संबंधित मीडिया रिपोर्ट दिखाने पर चीफ जस्टिस
दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने बार एसोसिएशनों को नोटिस जारी करते हुए सभी को जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। पीठ ने कहा कि यह वकीलों क कर्तव्य है कि वह वादी-प्रतिवादियों की सहायत करें और न्याय में रास्ते में रुकावट पैदा न करें।
पीठ ने कहा कि न्याय की प्रक्रिया में किसी तरह की रुकावट पैदा करना न्याय से विमुक्त करना है। पीठ ने कहा कि कई फैसलों में बार एसोसिएशन पर जस्टिस डिलिवरी सिस्टम में व्यावधान पैदा करने का प्रस्ताव लाने की पाबंदी लगाई गई है। पीठ ने कहा कि बार एसोसिएशन के सदस्य पीड़ित या आरोपी और अभियोजन पक्ष के वकीलों को अदालत में पेश होने पर व्यावधान न पहुंचाए। पीठ ने कहा कि अदालती कार्यवाही में किसी तरह की बाधा न उत्पन्न की जाए।
वास्तव में शुक्रवार सुबह वकील पीवी दिनेश सहित अन्य वकीलों ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मौखिक तौर पर कहा कि कठुआ गैंगरेप मामले में वकील अभियोजन पक्ष को अदालत में चार्जशीट दाखिल करने में रुकावट पैदा कर रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि पीड़ित के वकील को भी अदालत में पेश नहीं होने दिया जा रहा है।
वकीलों ने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को स्वत: संज्ञान लेना चाहिए। लेकिन पीठ ने कहा कि हमारे पास को लिखित रिकार्ड नहीं है। जिसके बाद वकीलों ने दोपहर बाद पीठ के समक्ष लिखित आवेदन दिया। जिसे रिकार्ड पर लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर परीक्षण करने का निर्णय लिया। वहीं राज्य सरकार के वकील ने बताया कि गत नौ अप्रैल को मजिस्ट्रेट केनिवास पर चार्जशीट दायर की गई। अगली सुनवाई 19 अप्रैल को होगी।